हरियाणा सरकार ने कर्मचारियों की तबादला नीति में बड़ा बदलाव करते हुए साफ कर दिया है कि अब किसी भी कर्मचारी को एक ही स्टेशन पर पांच वर्ष से अधिक समय तक बनाए रखने की छूट सीमित परिस्थितियों में ही दी जाएगी। नई व्यवस्था के तहत यह सुविधा केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगी, जिनकी सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम समय बाकी होगा।
राज्य सरकार ने इस संबंध में वर्ष 1998 में जारी पुराने निर्देशों में संशोधन करते हुए नई गाइडलाइन लागू की है। मुख्य सचिव Anurag Rastogi की ओर से जारी आदेश सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्डों, निगमों, प्राधिकरणों और जिला उपायुक्तों को भेज दिए गए हैं, ताकि नई नीति को तुरंत प्रभाव से लागू किया जा सके।
सरकार का मानना है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती रहने से प्रशासनिक संतुलन प्रभावित होता है और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता पर भी सवाल उठते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए अब सामान्य परिस्थितियों में कर्मचारियों का समय-समय पर स्थानांतरण सुनिश्चित किया जाएगा।
हालांकि सरकार ने रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों को कुछ राहत भी दी है। नए निर्देशों के मुताबिक यदि किसी कर्मचारी की सेवा अवधि समाप्त होने में एक वर्ष से कम समय बचा है, तो उसे पांच वर्ष से अधिक समय तक उसी स्टेशन पर कार्य करने की अनुमति दी जा सकती है। लेकिन जनहित को ध्यान में रखते हुए ऐसे कर्मचारियों का तबादला 20 किलोमीटर की परिधि के भीतर किसी दूसरे कार्यालय या संस्थान में किया जा सकेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 20 किलोमीटर के भीतर होने वाले ऐसे स्थानांतरण को नियमित ट्रांसफर नहीं माना जाएगा, क्योंकि इसमें कर्मचारी के निवास स्थान में बदलाव आवश्यक नहीं होगा। इस कारण ऐसे मामलों में कर्मचारियों को यात्रा भत्ता (टीए), दैनिक भत्ता (डीए) और ज्वाइनिंग टाइम जैसी सुविधाएं भी नहीं मिलेंगी। यह व्यवस्था Haryana Civil Services Rules 2016 के प्रावधानों के तहत लागू की जाएगी।
प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे विभागों में लंबे समय से जमे कर्मचारियों की स्थिति बदलेगी और अधिकारियों-कर्मचारियों की नियमित रोटेशन प्रणाली को मजबूती मिलेगी।
सूत्रों के अनुसार सरकार भविष्य में तबादला प्रक्रिया को और अधिक डिजिटल तथा पारदर्शी बनाने की दिशा में भी काम कर रही है, ताकि राजनीतिक या व्यक्तिगत प्रभाव की शिकायतों को कम किया जा सके। नई नीति लागू होने के बाद विभिन्न विभागों में लंबी अवधि से तैनात कर्मचारियों की सूची तैयार किए जाने की भी संभावना है।


