हरियाणा सरकार बिजली व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और उपभोक्ता केंद्रित बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। राज्य में बढ़ती बिजली मांग, ऊर्जा दक्षता और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण योजनाओं को गति दी जा रही है। इसी सिलसिले में बिजली क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं और योजनाओं की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र के भविष्य को लेकर व्यापक रणनीति पर चर्चा की गई।
बैठक के दौरान बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार, तकनीकी हानियों में कमी, राजस्व संग्रहण को मजबूत बनाने और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बिजली आपूर्ति प्रणाली को अधिक सक्षम बनाने के लिए नई तकनीकों का अधिकतम उपयोग किया जाए और सभी योजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए।
समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा ने बिजली वितरण क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। लाइन लॉस में लगातार कमी आई है और बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। अधिकारियों से कहा गया कि इन उपलब्धियों को बनाए रखने के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयारी की जाए।
बैठक में स्मार्ट मीटर और प्रीपेड मीटरिंग व्यवस्था को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। सरकार का मानना है कि आधुनिक मीटरिंग प्रणाली से बिजली खपत की निगरानी अधिक प्रभावी होगी और उपभोक्ताओं को अपनी ऊर्जा खपत पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा। इसके अलावा बिजली चोरी और बिलिंग से जुड़ी समस्याओं में भी कमी आने की उम्मीद है। नई व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना तैयार की जा रही है।
ऊर्जा क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए स्मार्ट ग्रिड और उन्नत निगरानी प्रणालियों पर भी विचार किया गया। अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में बिजली वितरण नेटवर्क को अधिक स्मार्ट और डेटा आधारित बनाने पर जोर दिया जाएगा ताकि किसी भी तकनीकी समस्या का तुरंत समाधान किया जा सके।
बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को लेकर भी समीक्षा की गई। सरकार की विभिन्न योजनाओं के कारण अब प्रदेश के अधिकांश गांवों में लंबे समय तक निर्बाध बिजली उपलब्ध हो रही है। अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली ढांचे को और मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त निवेश किया जा रहा है, जिससे कृषि और घरेलू उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।
राज्य की वर्तमान और भविष्य की बिजली जरूरतों पर चर्चा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि हरियाणा के पास वर्तमान मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध है। इसके साथ ही आने वाले वर्षों में बढ़ती आबादी और औद्योगिक विस्तार को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति पर काम किया जा रहा है। नई उत्पादन क्षमता और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को भी इस योजना में शामिल किया जा रहा है।
बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना भी रहा। सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक घरों, संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जाएं। इसके लिए विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पात्र परिवारों को योजनाओं की जानकारी देकर उनकी भागीदारी बढ़ाई जाए।
विशेष रूप से मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की रणनीति पर चर्चा हुई। सरकार का मानना है कि छतों पर सोलर सिस्टम लगाने से उपभोक्ताओं के बिजली बिल में कमी आएगी और राज्य में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मदद मिलेगी।
बैठक में प्रधानमंत्री कुसुम योजना और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रमों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसानों और ग्रामीण उपभोक्ताओं तक इन योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए।
सरकार का लक्ष्य हरियाणा को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सशक्त राज्य के रूप में विकसित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट मीटरिंग, सौर ऊर्जा विस्तार और बिजली वितरण प्रणाली के आधुनिकीकरण जैसे कदम भविष्य में प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत बनाएंगे तथा उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं प्रदान करेंगे।




