हिमाचल के युवाओं के लिए सुनहरा अवसर, सिर्फ 1% ब्याज पर मिलेगा 20 लाख तक शिक्षा ऋण; CM सुक्खू ने गिनाईं सरकार की नई पहलें

हिमाचल के युवाओं के लिए सुनहरा अवसर, सिर्फ 1% ब्याज पर मिलेगा 20 लाख तक शिक्षा ऋण; CM सुक्खू ने गिनाईं सरकार की नई पहलें

हिमाचल प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विद्यार्थियों को सरकार की विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि आर्थिक संसाधनों की कमी किसी भी छात्र की पढ़ाई में बाधा नहीं बनने दी जाएगी। राज्य सरकार योग्य विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और पेशेवर पाठ्यक्रमों के लिए बेहद रियायती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध करा रही है, जिससे वे अपने सपनों को साकार कर सकें।

सचिवालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना का लाभ प्राप्त कर रहे अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस दौरान छात्रों ने अपने शैक्षणिक अनुभव साझा किए और सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि डॉ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना के तहत छात्रों को 20 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण केवल एक प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। यह योजना उन विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जो इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट, कानून, शोध तथा अन्य व्यावसायिक और उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेना चाहते हैं। उनका कहना था कि कम ब्याज दर के कारण छात्रों और उनके परिवारों पर वित्तीय बोझ काफी हद तक कम होगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए व्यापक सुधार लागू कर रही है। प्रदेश के कई सरकारी शिक्षण संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया गया है, जबकि विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए नए शैक्षणिक मॉडल अपनाए जा रहे हैं। इसी दिशा में 156 से अधिक सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू किया गया है, जिससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा का लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन स्कूलों में कला, विज्ञान और वाणिज्य तीनों संकायों की पढ़ाई उपलब्ध कराई जा रही है। इससे विद्यार्थियों को अपनी रुचि और करियर लक्ष्य के अनुसार विषय चुनने की बेहतर सुविधा मिलेगी। उन्होंने दावा किया कि शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों का सकारात्मक प्रभाव दिखाई देने लगा है और हाल के वर्षों में प्रदेश की शैक्षणिक गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार शिक्षा को केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी साधन मानती है। इसी सोच के तहत छात्रवृत्ति, ऋण सहायता, डिजिटल शिक्षा, स्कूलों के उन्नयन और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में लगातार निवेश किया जा रहा है।

सुक्खू ने समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बेटियों को समान अधिकार और अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से विवाह योग्य आयु को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं, ताकि लड़कियां उच्च शिक्षा प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन सकें और अपने करियर को मजबूती से आगे बढ़ा सकें।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अनुसूचित जनजाति समुदाय के योगदान और उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों को सम्मान देने के लिए प्रदेशभर में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके तहत विभिन्न क्षेत्रों में विद्यार्थियों को शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक विकास से जुड़े विषयों पर जानकारी प्रदान की जा रही है।

कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया और विद्यार्थियों को सरकार की विभिन्न छात्रवृत्ति एवं सहायता योजनाओं की जानकारी दी। अधिकारियों ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश का कोई भी छात्र आर्थिक कारणों से उच्च शिक्षा से वंचित न रहे।