चंडीगढ़ में यूटी कर्मचारियों के लिए वर्ष 2008 में शुरू की गई बहुचर्चित हाउसिंग स्कीम एक बार फिर कानूनी विवादों के केंद्र में आ गई है। हजारों कर्मचारी पिछले करीब 17 वर्षों से अपने फ्लैट्स का इंतजार कर रहे हैं, जबकि अब इस मामले की अगली अहम सुनवाई 13 मई को सुप्रीम कोर्ट में होने जा रही है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि लंबे संघर्ष के बाद उन्हें आखिरकार राहत मिल सकती है।
यह योजना खास तौर पर उन कर्मचारियों के लिए लाई गई थी जिनके पास खुद का मकान नहीं था। उस समय यूटी प्रशासन ने ड्रा ऑफ लॉट्स के जरिए 3,920 कर्मचारियों को सफल घोषित किया था। कर्मचारियों ने स्कीम के तहत निर्धारित प्रक्रिया पूरी की और वर्षों तक आवंटन का इंतजार किया, लेकिन मामला कानूनी पेचीदगियों में उलझता चला गया।
कर्मचारियों की ओर से लगातार यह दलील दी जाती रही है कि प्रशासन की देरी के कारण उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी। कई कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं, जबकि कुछ कर्मचारियों का निधन भी हो चुका है, लेकिन उनके परिवार अब भी फ्लैट मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए यूटी प्रशासन को निर्देश दिया था कि फ्लैट्स का आवंटन मूल भूमि लागत और वर्तमान निर्माण लागत के आधार पर किया जाए। हाईकोर्ट ने माना था कि कर्मचारियों को प्रशासनिक देरी का खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए।
हालांकि यूटी प्रशासन ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। प्रशासन का तर्क है कि वर्तमान समय में जमीन की कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं, इसलिए फ्लैट्स का आवंटन मौजूदा बाजार दरों के अनुसार किया जाना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट में अंतिम कानूनी लड़ाई चल रही है।
एम्प्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन, चंडीगढ़ के महासचिव विजय जुनेजा ने बताया कि 2,143 कर्मचारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अधिवक्ता राजीव भल्ला अदालत में पक्ष रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और उन्हें उम्मीद है कि वर्षों से लंबित यह मामला जल्द सुलझेगा।
पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द सुनवाई के निर्देश दिए थे। अब 13 मई की सुनवाई को हजारों कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर फैसला कर्मचारियों के पक्ष में आता है तो लंबे समय से अपने घर का सपना देख रहे हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है।



