ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा इस बार कई खास संयोगों के साथ आई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह पूर्णिमा अत्यंत शुभ मानी जा रही है क्योंकि ज्येष्ठ महीने में अधिकमास का संयोग करीब 8 साल बाद बना है। इससे पहले ऐसा योग वर्ष 2018 में देखने को मिला था। खगोलीय दृष्टि से भी यह दिन बेहद खास है। मई महीने में दूसरी बार पूर्णिमा पड़ने के कारण इसे “ब्लू मून” कहा जा रहा है। वहीं आज चंद्रमा पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी पर होने के कारण “माइक्रोमून” की स्थिति भी बन रही है, जिससे चंद्रमा सामान्य से थोड़ा छोटा दिखाई देगा।
कब तक रहेगी पूर्णिमा तिथि?
वैदिक पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा की शुरुआत 30 मई 2026 को सुबह 11:58 बजे हुई थी, जो 31 मई 2026 को दोपहर 2:14 बजे तक रहेगी। इस दिन स्नान, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा तथा दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है।
धन और सौभाग्य के लिए करें ये कार्य
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा पर जरूरतमंदों की सहायता करने और दान देने से सकारात्मक फल प्राप्त होते हैं। विशेष रूप से माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार निम्न वस्तुओं का दान शुभ माना गया है।
फलों का दान बढ़ाएगा पुण्य
ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी को देखते हुए आम, खरबूजा, तरबूज जैसे रसदार फलों का दान करना लाभकारी माना गया है। मान्यता है कि इससे सूर्य और मंगल से जुड़े दोषों का प्रभाव भी कम हो सकता है।
जलदान को माना गया महादान
गर्मी के मौसम में प्यासे लोगों को पानी पिलाना, प्याऊ लगवाना, शरबत वितरित करना या जल से भरे घड़े दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। पक्षियों के लिए पानी और दाना रखना भी शुभ कार्यों में शामिल है।
जूते-चप्पल और छाते का दान
तेज धूप और आने वाले वर्षा ऋतु को देखते हुए गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को छाता, जूते या चप्पल भेंट करना भी शुभ माना गया है। यह दान सेवा और सहानुभूति का प्रतीक माना जाता है।
अन्न और वस्त्र दान का विशेष महत्व
पूर्णिमा के अवसर पर जरूरतमंदों को भोजन कराना, अनाज, वस्त्र या आर्थिक सहायता देना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। धार्मिक ग्रंथों में ऐसे दान को कल्याणकारी और सुख-समृद्धि बढ़ाने वाला बताया गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस विशेष पूर्णिमा पर किए गए दान, पूजा और सेवा कार्य व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य के नए अवसर लेकर आ सकते हैं।
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