देश के लगभग हर घर की रसोई में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी (LPG) यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस हमारे दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह गैस आखिर बनती कैसे है और हमारे घरों तक कैसे पहुंचती है।
कैसे बनती है LPG
एलपीजी मुख्य रूप से दो स्रोतों से प्राप्त होती है—कच्चे तेल (Crude Oil) के रिफाइनिंग प्रोसेस से और प्राकृतिक गैस (Natural Gas) के प्रोसेसिंग से। जब कच्चे तेल को रिफाइनरी में अलग-अलग पेट्रोलियम उत्पादों में बदला जाता है, तब उसमें से प्रोपेन (Propane) और ब्यूटेन (Butane) गैस निकलती हैं। इन दोनों गैसों को मिलाकर एलपीजी तैयार की जाती है।
गैस को तरल क्यों बनाया जाता है
सामान्य तापमान पर प्रोपेन और ब्यूटेन गैस के रूप में होती हैं, लेकिन जब इन्हें दबाव में रखा जाता है तो ये तरल (Liquid) बन जाती हैं। इसी वजह से इसे सिलेंडर में आसानी से स्टोर और ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है।
रिफाइनरी से प्लांट तक का सफर
रिफाइनरी में तैयार होने के बाद एलपीजी को बड़े टैंकर, पाइपलाइन या रेल के जरिए एलपीजी बॉटलिंग प्लांट तक भेजा जाता है। यहां बड़े स्टोरेज टैंकों में गैस को सुरक्षित रखा जाता है।
सिलेंडर में कैसे भरी जाती है गैस
बॉटलिंग प्लांट में खाली सिलेंडरों की जांच की जाती है और फिर ऑटोमेटिक मशीनों के जरिए उनमें तय मात्रा में गैस भरी जाती है। भरने के बाद सिलेंडरों की लीकेज जांच, वजन और सीलिंग की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
आपके घर तक कैसे पहुंचती है
सिलेंडर भरने के बाद इन्हें ट्रकों के जरिए गैस एजेंसियों तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद गैस एजेंसी के डिलीवरी कर्मचारी इन्हें उपभोक्ताओं के घर तक पहुंचाते हैं।
सुरक्षा के लिए मिलाई जाती है खास गंध
एलपीजी गैस स्वाभाविक रूप से बिना गंध की होती है। इसलिए सुरक्षा के लिए इसमें एथिल मर्कैप्टन नामक एक केमिकल मिलाया जाता है, जिससे गैस लीक होने पर तुरंत तेज गंध महसूस हो जाती है और दुर्घटना से बचाव संभव होता है।
इस तरह कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस से बनने वाली एलपीजी कई चरणों से गुजरते हुए आखिरकार सिलेंडर के रूप में हमारे घर की रसोई तक पहुंचती है और रोजमर्रा के खाना बनाने में इस्तेमाल होती है।




