मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब 26वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन लगातार हमलों के बीच कूटनीतिक हल की उम्मीद भी मजबूत होती दिखाई दे रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की ‘5 दिन नो-अटैक’ रणनीति का असर अब धीरे-धीरे सामने आने लगा है, जिससे दोनों देशों के बीच बातचीत का माहौल बन रहा है।
हालांकि जमीनी हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं। ईरान ने इजरायल के कई इलाकों और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है, जिसमें क्लस्टर बमों के इस्तेमाल की खबरें सामने आई हैं। इसके जवाब में इजरायल ने इस्फहान की मिसाइल लॉन्च साइट और तेहरान-बेरुत कॉरिडोर के कुछ अहम ठिकानों को निशाना बनाया है। दोनों ओर भारी नुकसान की सूचनाएं मिल रही हैं।
इसी बीच, ट्रंप प्रशासन युद्ध को खत्म करने के लिए सक्रिय रूप से शांति समझौते की दिशा में काम कर रहा है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि यदि ईरान समझौते के लिए आगे नहीं बढ़ता, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस संभावित डील से अमेरिका को तेल और गैस सेक्टर में बड़ा रणनीतिक लाभ मिल सकता है।
वहीं दूसरी ओर, ईरान का रुख भी बातचीत को लेकर पूरी तरह बंद नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान ने अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर के साथ बातचीत से इनकार कर दिया है। इसके बजाय ईरान उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को एक अपेक्षाकृत संतुलित और नरम विकल्प मानते हुए सीधे उनसे बातचीत करने की इच्छा जता रहा है।
ट्रंप ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच बैकचैनल बातचीत जारी है और ईरान समझौते के लिए इच्छुक नजर आ रहा है। उन्होंने 15 बिंदुओं वाले एक संभावित शांति प्लान का जिक्र किया, हालांकि इसकी पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
मौजूदा हालात में जहां एक ओर मिसाइलों और जवाबी हमलों का दौर जारी है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक कोशिशें भी तेज हो गई हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह तय होगा कि यह टकराव और भड़कता है या फिर बातचीत के जरिए शांति की राह निकलती है।




