21 अप्रैल से पहले डील की दौड़: अमेरिका-ईरान समझौते की राह पर, तेहरान में अहम कूटनीतिक हलचल

21 अप्रैल से पहले डील की दौड़: अमेरिका-ईरान समझौते की राह पर, तेहरान में अहम कूटनीतिक हलचल

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच दक्षिणी लेबनान के बिंत जेबेल इलाके में गुरुवार सुबह इजराइली सेना और हिजबुल्लाह के बीच तीखी झड़पें देखने को मिलीं। इजराइल ने फाइटर जेट और हेलिकॉप्टर से हमले किए, जिसमें कई इमारतें तबाह हो गईं। तेबनीन कस्बे पर हुए एयर स्ट्राइक में एक अस्पताल भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ।

इसी बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए बातचीत निर्णायक दौर में पहुंचती दिख रही है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 21 अप्रैल को समाप्त हो रहे सीजफायर से पहले दोनों देश किसी समझौते तक पहुंचने की कोशिश में हैं, हालांकि कुछ मुद्दों पर अभी भी सहमति बननी बाकी है।

तेहरान इस समय कूटनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ईरान पहुंच चुके हैं, जहां उन्होंने विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की। माना जा रहा है कि वह अमेरिका का संदेश लेकर आए हैं और बातचीत को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस प्रक्रिया में पाकिस्तान के साथ-साथ मिस्र और तुर्की भी मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।

वहीं, अमेरिकी पक्ष से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर बातचीत के मसौदे पर काम कर रहे हैं और ड्राफ्ट प्रस्ताव साझा किए जा रहे हैं। बैकचैनल डिप्लोमेसी के जरिए दोनों देशों के बीच संवाद लगातार जारी है। दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के चलते ईरान के तेल निर्यात पर असर पड़ा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, पिछले 48 घंटों में कोई भी जहाज ईरानी बंदरगाह तक नहीं पहुंच सका और 9 जहाजों को वापस लौटना पड़ा।

ईरान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल निर्यात पर निर्भर है। रोजाना करीब 15 लाख बैरल तेल निर्यात से उसे लगभग 140 मिलियन डॉलर की आमदनी होती है, लेकिन नाकेबंदी के चलते यह आय प्रभावित हो सकती है। खार्ग द्वीप, जहां से ईरान का अधिकांश तेल निर्यात होता है, भी इस स्थिति से प्रभावित है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि नाकेबंदी जारी रही तो वह रेड सी, ओमान सागर और पर्शियन गल्फ में समुद्री व्यापार को प्रभावित कर सकता है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है।

इसी बीच, परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में कुछ प्रगति के संकेत मिले हैं। हालिया कूटनीतिक प्रयासों के बाद दोनों देश समझौते की दिशा में आगे बढ़ते दिख रहे हैं। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं और कुछ गुट इस संभावित समझौते का विरोध भी कर रहे हैं। पिछले 24 घंटों में स्थिति तेजी से बदली है, एक तरफ कूटनीतिक प्रयास तेज हुए हैं, तो दूसरी ओर सैन्य गतिविधियां भी जारी हैं, जिससे क्षेत्र में अनिश्चितता बनी हुई है।