नेपाल में नए भंसार नियम का असर: महंगाई बढ़ी, सीमा बाजारों में सन्नाटा

नेपाल में नए भंसार नियम का असर: महंगाई बढ़ी, सीमा बाजारों में सन्नाटा

नेपाल में हाल ही में लागू किए गए सख्त भंसार (कस्टम) नियमों ने आम लोगों की जिंदगी पर गहरा असर डालना शुरू कर दिया है। सीमा पर जांच बढ़ाए जाने और शुल्क नियमों को कड़ाई से लागू करने के बाद जहां एक ओर सरकार अवैध व्यापार पर लगाम लगाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर आम जनता और छोटे व्यापारियों को इसका सीधा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

दरअसल, नेपाल सरकार ने 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर अनिवार्य कस्टम शुल्क लागू कर दिया है। इस फैसले के बाद सीमा से आने-जाने वाले हर व्यक्ति और सामान की बारीकी से जांच की जा रही है। पहले जहां लोग दैनिक जरूरतों का सामान खरीदने के लिए आसानी से भारत-नेपाल सीमा पार कर लेते थे, अब उन्हें अतिरिक्त टैक्स और जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। इसका नतीजा यह हुआ है कि सीमावर्ती इलाकों में खरीदारी का पुराना सिस्टम लगभग ठप पड़ गया है।

भैरहवा और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का कहना है कि इस सख्ती के बाद जरूरी सामानों की कीमतों में अचानक उछाल आया है। पहले जो सामान सस्ता मिल जाता था, अब वह महंगा हो गया है। खासकर किराना, घरेलू उपयोग की चीजें और छोटे-मोटे उपभोक्ता उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी से आम परिवारों का बजट बिगड़ गया है।

इसका असर सिर्फ नेपाल के अंदर ही नहीं, बल्कि भारतीय सीमा से लगे बाजारों पर भी साफ नजर आ रहा है। उत्तर प्रदेश के सोनौली जैसे बाजार, जो नेपाली ग्राहकों से हमेशा गुलजार रहते थे, अब काफी हद तक सूने हो गए हैं। दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों की संख्या में 70-75 फीसदी तक की गिरावट आई है। इससे उनकी बिक्री पर बुरा असर पड़ा है और कारोबार ठप होने की स्थिति बन रही है।

हालांकि, नेपाली अधिकारियों का कहना है कि यह कदम किसी भी तरह से भारतीय सामानों को रोकने के लिए नहीं है, बल्कि अवैध तरीके से होने वाले व्यापार को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, पहले कई लोग घरेलू उपयोग का बहाना बनाकर बार-बार सीमा पार करते थे और बड़ी मात्रा में सामान बिना टैक्स दिए ले जाते थे, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता था।

भैरहवा कस्टम कार्यालय के अधिकारियों का दावा है कि सख्ती के बाद इस तरह की गतिविधियों में कमी आई है और तस्करी पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया गया है। वहीं, नेपाल के व्यापारिक संगठनों का मानना है कि इससे वैध व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और लंबे समय में बाजार व्यवस्था बेहतर होगी।

फेडरेशन ऑफ कस्टम एजेंट्स नेपाल के प्रतिनिधियों का कहना है कि सीमा पर निगरानी बढ़ने से कस्टम प्रक्रिया के जरिए होने वाला व्यापार बढ़ा है। कस्टम गोदामों में सामान की आवाजाही भी बढ़ी है, जो इस बात का संकेत है कि लोग अब नियमों का पालन कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी चिंता जताई है कि कुछ लोग वैकल्पिक रास्तों से तस्करी की कोशिश कर रहे हैं, जिस पर सख्त निगरानी की जरूरत है।

दूसरी ओर, आम उपभोक्ताओं की परेशानी लगातार बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि उन्हें अब रोजमर्रा की चीजों के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। कई परिवारों ने खर्च कम करने के लिए अपनी खरीदारी की आदतों में बदलाव करना शुरू कर दिया है।

कुल मिलाकर, नेपाल सरकार का यह कदम जहां एक ओर व्यवस्था सुधार और राजस्व बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसका तत्काल प्रभाव आम लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला साबित हो रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस संतुलन को कैसे साधती है, ताकि अवैध व्यापार पर रोक भी लगे और आम जनता पर बोझ भी कम हो सके।