अमेरिकी कोर्ट ने ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ पर लगाई रोक, 10% आयात शुल्क को बताया गैरकानूनी

अमेरिकी कोर्ट ने ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ पर लगाई रोक, 10% आयात शुल्क को बताया गैरकानूनी

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प की टैरिफ नीति को बड़ा झटका लगा है। फेडरल ट्रेड कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन द्वारा लागू किए गए 10% वैश्विक आयात शुल्क को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति ने कांग्रेस से मंजूरी लिए बिना अपने अधिकारों का दायरा पार किया।

कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए माना कि 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 का इस्तेमाल इस तरह के व्यापक टैरिफ लगाने के लिए नहीं किया जा सकता। जजों ने साफ कहा कि सिर्फ व्यापार घाटा बढ़ना, कानून में तय “गंभीर आर्थिक संकट” की श्रेणी में नहीं आता।

दरअसल ट्रम्प प्रशासन ने इसी साल फरवरी में एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए दुनिया भर से आने वाले सामानों पर 10% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। प्रशासन का कहना था कि अमेरिका लगातार बढ़ते ट्रेड डेफिसिट और करंट अकाउंट घाटे से जूझ रहा है, इसलिए यह कदम जरूरी था।

हालांकि अदालत ने सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि कांग्रेस ने राष्ट्रपति को सीमित परिस्थितियों में ही अस्थायी टैरिफ लगाने की शक्ति दी है और इस मामले में उन शर्तों का पालन नहीं हुआ।

इस फैसले के पीछे छोटे अमेरिकी कारोबारियों की याचिकाएं भी अहम रहीं। ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर कंपनियों ने अदालत में कहा था कि नए टैरिफ से उनका बिजनेस बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। खिलौना बनाने वाली कंपनी बेसिक फन के CEO जे मय फोरमैन ने इसे अमेरिकी कंपनियों की बड़ी जीत बताया।

उन्होंने कहा कि अतिरिक्त शुल्क की वजह से कारोबार चलाना मुश्किल हो गया था और अब अदालत के फैसले से उद्योग जगत को राहत मिलेगी। खासतौर पर वे कंपनियां जिन्हें विदेशों से कच्चा माल और प्रोडक्ट मंगाने पड़ते हैं, उन्हें अब ज्यादा स्पष्टता मिलेगी।

भारत के नजरिए से भी यह फैसला अहम माना जा रहा है। ट्रम्प पहले भी भारतीय उत्पादों और व्यापारिक नीतियों पर सख्त रुख अपनाते रहे हैं। ऐसे में अमेरिकी अदालत द्वारा ग्लोबल टैरिफ नीति पर रोक लगाना भारतीय निर्यातकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय सामानों की लागत बढ़ने का खतरा कम हो सकता है।

अब माना जा रहा है कि ट्रम्प प्रशासन इस फैसले को चुनौती देगा। मामला पहले फेडरल अपील कोर्ट में जाएगा और जरूरत पड़ने पर फिर से अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकता है।

गौरतलब है कि ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 राष्ट्रपति को सिर्फ 150 दिनों तक अस्थायी टैरिफ लगाने की अनुमति देती है और वह भी तब, जब देश गंभीर भुगतान संतुलन संकट या मुद्रा स्थिरता के खतरे का सामना कर रहा हो।