कर्ज और आर्थिक संकट से जूझते हिमाचल का बड़ा दांव: 27 साल बाद फिर शुरू होगी ऑनलाइन लॉटरी योजना

कर्ज और आर्थिक संकट से जूझते हिमाचल का बड़ा दांव: 27 साल बाद फिर शुरू होगी ऑनलाइन लॉटरी योजना

आर्थिक चुनौतियों और बढ़ते कर्ज के दबाव से गुजर रही Himachal Pradesh सरकार अब राजस्व बढ़ाने के लिए पुराने विकल्पों को नए स्वरूप में वापस लाने की तैयारी में है। प्रदेश में करीब 27 वर्षों बाद एक बार फिर लॉटरी व्यवस्था शुरू होने जा रही है। Sukhvinder Singh Sukhu सरकार ने इस योजना को आधुनिक डिजिटल सिस्टम के साथ लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है और स्थानीय निकाय चुनावों की आचार संहिता समाप्त होते ही इसकी औपचारिक शुरुआत किए जाने की संभावना है।

सरकार का मानना है कि मौजूदा वित्तीय संकट से बाहर निकलने के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित करना बेहद जरूरी हो गया है। यही वजह है कि जुलाई 2025 में हुई कैबिनेट बैठक में लॉटरी पर वर्षों से लगे प्रतिबंध को हटाने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद नियमावली तैयार करने और तकनीकी ढांचा विकसित करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई गई।

सूत्रों के अनुसार इस बार लॉटरी प्रणाली पूरी तरह ऑनलाइन होगी। टिकट खरीदने से लेकर ड्रा और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित की जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और अनियमितताओं की आशंका कम होगी। विशेष सॉफ्टवेयर भी तैयार किया गया है, जिससे पूरी व्यवस्था की निगरानी की जा सकेगी।

प्रदेश के प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार के अनुसार इस बार पारंपरिक तरीके से खुले बाजार में लॉटरी टिकटों की बिक्री नहीं होगी। लोग ऑनलाइन माध्यम से इसमें भाग ले सकेंगे। हालांकि विशेष अवसरों पर “लकी ड्रा” आयोजित किए जा सकते हैं, जिनके टिकट सीमित स्थानों पर उपलब्ध कराए जाएंगे।

सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से हर वर्ष 75 से 100 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है। हालांकि यह राशि प्रदेश पर चढ़े विशाल कर्ज की तुलना में बहुत बड़ी नहीं मानी जा रही, लेकिन सरकार इसे वित्तीय सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है।

वर्तमान में हिमाचल प्रदेश पर लगभग 1.10 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बताया जा रहा है। वित्तीय स्थिति ऐसी है कि सरकार को नियमित खर्च और विकास योजनाओं के लिए लगातार उधार लेना पड़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक सैकड़ों करोड़ रुपये का नया ऋण लिया जा चुका है और आने वाले समय में अतिरिक्त कर्ज लेने की भी तैयारी चल रही है।

लॉटरी की वापसी को केवल आर्थिक फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। एक ओर सरकार इसे राजस्व बढ़ाने का व्यावहारिक तरीका बता रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने इस कदम को लेकर चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि लॉटरी की वजह से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

गौरतलब है कि वर्ष 1999 में तत्कालीन मुख्यमंत्री Prem Kumar Dhumal की सरकार ने सामाजिक कारणों का हवाला देते हुए प्रदेश में लॉटरी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। उस समय कई परिवारों, खासकर महिलाओं ने शिकायत की थी कि घर के पुरुष सदस्य लॉटरी में बड़ी रकम गंवा रहे हैं, जिससे परिवार आर्थिक संकट में फंस रहे हैं। इसके बाद राज्य में लॉटरी पूरी तरह बंद कर दी गई थी।

अब लगभग तीन दशक बाद बदलती आर्थिक परिस्थितियों में सरकार इसे नए डिजिटल मॉडल के साथ दोबारा लागू करने जा रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह योजना सरकार की आर्थिक स्थिति सुधारने में कितनी मददगार साबित होती है और समाज में इसे किस तरह स्वीकार किया जाता है।