पंजाब सरकार ने विदेशों में रह रहे पंजाबियों की समस्याओं के समाधान के लिए एक बार फिर विशेष पहल करते हुए 13 मई को ऑनलाइन “एनआरआई मिलनी” आयोजित करने का फैसला किया है। इस कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री डॉ रवजोत सिंह स्वयं एनआरआई समुदाय से सीधा संवाद करेंगे और उनकी शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए संबंधित विभागों को निर्देश जारी किए जाएंगे।
सरकार का उद्देश्य विदेशों में बसे पंजाबियों को अपनी समस्याएं लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने या पंजाब आने की आवश्यकता से राहत देना है। इस ऑनलाइन मिलनी के दौरान ईमेल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और डिजिटल माध्यमों के जरिए शिकायतें सुनी जाएंगी। अधिकारियों के अनुसार जमीन विवाद, पुलिस मामलों, प्रशासनिक देरी, दस्तावेजी समस्याओं और पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाएगा।
पंजाब सरकार ने एनआरआई समुदाय के साथ संवाद मजबूत करने के लिए इस कार्यक्रम की शुरुआत दिसंबर 2022 में की थी। शुरुआती चरण में जालंधर, मोहाली, लुधियाना, मोगा और अमृतसर जैसे प्रमुख जिलों में एनआरआई मिलनी आयोजित की गई थी, जहां बड़ी संख्या में विदेशों में बसे पंजाबियों ने अपनी शिकायतें दर्ज करवाई थीं।
इसके बाद फरवरी 2024 में इस पहल का दायरा और बढ़ाया गया। पठानकोट, शहीद भगत सिंह नगर, फिरोजपुर और संगरूर सहित कई जिलों में भी कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिससे सरकार को सीधे तौर पर एनआरआई समुदाय की समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने का अवसर मिला।
सरकार अब इस व्यवस्था को और अधिक नियमित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मई 2026 से निर्णय लिया गया है कि हर महीने दो एनआरआई मिलनियां आयोजित की जाएंगी। इनमें एक ऑनलाइन माध्यम से होगी, जबकि दूसरी व्यक्तिगत या डिवीजन स्तर पर आयोजित की जाएगी। इससे विदेशों में बसे पंजाबियों को लगातार प्रशासनिक सहयोग और संवाद का मंच उपलब्ध हो सकेगा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2022 में आयोजित पहली एनआरआई मिलनी में लगभग 609 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। वहीं फरवरी 2024 में आयोजित बैठकों के दौरान 309 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 256 मामलों का समाधान कर दिया गया। जनवरी 2025 तक ऑनलाइन सत्रों के जरिए 542 से अधिक शिकायतें सामने आईं, जिनमें से 488 मामलों का निपटारा किया जा चुका है।
पंजाब सरकार का दावा है कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से विदेशों में रह रहे पंजाबियों का प्रशासन पर भरोसा बढ़ा है और कई लंबित मामलों को तेजी से निपटाने में सफलता मिली है। सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पारदर्शी और समयबद्ध समाधान देने से एनआरआई समुदाय को बड़ी राहत मिलेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि पंजाब से बड़ी संख्या में लोग विदेशों में रहते हैं और राज्य की अर्थव्यवस्था में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। ऐसे में उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई यह डिजिटल पहल प्रशासन और प्रवासी पंजाबियों के बीच मजबूत कड़ी साबित हो सकती है।




