हिमाचल के स्कूली बच्चों के पोषण पर फोकस, केंद्र से मिड-डे मील बजट बढ़ाने की बड़ी मांग

हिमाचल के स्कूली बच्चों के पोषण पर फोकस, केंद्र से मिड-डे मील बजट बढ़ाने की बड़ी मांग

हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्कूलों में चल रही पीएम पोषण शक्ति निर्माण योजना (मिड-डे मील) को और मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार से अतिरिक्त वित्तीय सहायता की मांग उठाई है। राज्य सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए करीब 119 करोड़ रुपये का बजट मांगा है, ताकि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों को बेहतर पोषण सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

सोमवार को शिक्षा मंत्रालय के साथ आयोजित प्री-प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (प्री-पैब) की वर्चुअल बैठक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया। बैठक में हिमाचल प्रदेश के शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने राज्य का पक्ष रखते हुए कहा कि बढ़ती महंगाई और खाद्य सामग्री की लागत को देखते हुए मौजूदा बजट पर्याप्त नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति तैयार की है, जिसमें योजना के तहत किए जा रहे कार्यों और भविष्य की जरूरतों का पूरा ब्यौरा शामिल किया गया है।

जानकारी के अनुसार, 20 मई के बाद दिल्ली में होने वाली प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की अहम बैठक में हिमाचल की मांगों पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। राज्य सरकार को उम्मीद है कि बच्चों के पोषण और शिक्षा से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर केंद्र सकारात्मक रुख अपनाएगा।

हिमाचल सरकार ने केवल बजट बढ़ाने की मांग ही नहीं की, बल्कि मिड-डे मील योजना से जुड़े वर्करों और हेल्परों के मानदेय में बढ़ोतरी का मुद्दा भी मजबूती से रखा। राज्य का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2011 के बाद इस मद में कोई खास वृद्धि नहीं की गई है, जबकि महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है। वर्तमान में केंद्र सरकार प्रति वर्कर मात्र 900 रुपये देती है, जबकि हिमाचल सरकार अपने स्तर पर राशि बढ़ाकर प्रत्येक वर्कर को करीब 5 हजार रुपये मासिक मानदेय दे रही है।

प्रदेश में इस समय करीब 21,532 मिड-डे मील वर्कर और हेल्पर कार्यरत हैं, जो सरकारी स्कूलों में बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने का काम संभाल रहे हैं। पहली से आठवीं कक्षा तक के लगभग 4 लाख 82 हजार विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ मिल रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि यदि केंद्र से अधिक सहायता मिलती है तो भोजन की गुणवत्ता और पोषण स्तर को और बेहतर बनाया जा सकेगा।

हिमाचल प्रदेश ने पिछले कुछ समय में स्कूल पोषण योजना में कई नए प्रयोग भी शुरू किए हैं। बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सप्ताह में दो दिन अंडा और केला देने की व्यवस्था भी लागू की गई है। सरकार का कहना है कि इससे विद्यार्थियों में कुपोषण की समस्या कम करने और उनकी शारीरिक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने हिमाचल को मिड-डे मील योजना के तहत करीब 110 करोड़ रुपये जारी किए थे, जिसमें 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र और 10 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार का था। लेकिन बढ़ती जरूरतों और खर्चों को देखते हुए प्रदेश सरकार अब अधिक फंड की मांग कर रही है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि स्कूलों में बेहतर पोषण मिलने से विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ती है और पढ़ाई में भी सकारात्मक असर देखने को मिलता है। यही वजह है कि राज्य सरकार अब इस योजना को और व्यापक तथा प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है।