पंजाब सरकार में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारियां नए मंत्रियों को सौंप दी हैं। यह बदलाव कैबिनेट मंत्री Sanjeev Arora की गिरफ्तारी के बाद किया गया है, जिसके चलते उनके पास मौजूद विभागों का पुनर्वितरण करना पड़ा।
सरकार द्वारा जारी आदेशों के अनुसार कैबिनेट मंत्री Tarunpreet Singh Sond को बिजली विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं Harjot Singh Bains को स्थानीय निकाय विभाग का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। इसके अलावा वरिष्ठ मंत्री Aman Arora को उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राज्य सरकार के इस फैसले को केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी के बाद विपक्ष लगातार आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साध रहा है, वहीं सरकार प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो इसलिए विभागों के पुनर्गठन में तेजी दिखा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिजली, स्थानीय निकाय और उद्योग जैसे विभाग पंजाब सरकार के लिए काफी अहम हैं, क्योंकि इनका सीधा संबंध शहरी विकास, निवेश, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा हुआ है। ऐसे में सरकार नहीं चाहती कि किसी भी स्तर पर प्रशासनिक कार्य प्रभावित हों।
बिजली विभाग की जिम्मेदारी मिलने के बाद तरुणप्रीत सिंह सौंध के सामने राज्य में बिजली आपूर्ति, किसानों को दी जा रही सब्सिडी और गर्मियों के दौरान बढ़ती मांग जैसी बड़ी चुनौतियां रहेंगी। वहीं हरजोत सिंह बैंस को स्थानीय निकाय विभाग मिलने के बाद नगर निगमों, नगर परिषदों और शहरी विकास परियोजनाओं की निगरानी करनी होगी, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों का माहौल बन रहा है।
उद्योग विभाग संभालने वाले अमन अरोड़ा के सामने निवेश आकर्षित करने, औद्योगिक विकास को गति देने और रोजगार के अवसर बढ़ाने जैसी जिम्मेदारियां होंगी। पंजाब सरकार पहले ही राज्य में नए निवेश और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री भगवंत मान आने वाले दिनों में प्रशासनिक स्तर पर और भी बदलाव कर सकते हैं, ताकि सरकार की कार्यप्रणाली सुचारु बनी रहे। वहीं विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठा रहा है और पारदर्शिता की मांग कर रहा है।
पंजाब की राजनीति में इस फेरबदल को आने वाले समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे सरकार की आंतरिक रणनीति और राजनीतिक संतुलन दोनों पर असर पड़ सकता है।




