हरियाणा में सरकारी भर्तियों को लेकर एक बार फिर राजनीति गरमा गई है। जननायक जनता पार्टी के युवा नेता दिग्विजय चौटाला ने राज्य सरकार की भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश के युवाओं के भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार नौकरियों के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभा रही है, जबकि हजारों शिक्षित युवा रोजगार के इंतजार में भटक रहे हैं।
दिग्विजय चौटाला ने कहा कि भाजपा सरकार बेरोजगारी कम करने की बजाय उसे और बढ़ाने का काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में बेहद कम भर्तियां निकाली जा रही हैं और उनमें भी चयन प्रक्रिया ऐसी बनाई जा रही है कि बड़ी संख्या में पद खाली रह जाते हैं। इससे युवाओं में निराशा और गुस्सा लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने मनोविज्ञान विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर (कॉलेज कैडर) भर्ती का उदाहरण देते हुए कहा कि 85 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया चलाई गई, लेकिन उसमें केवल तीन उम्मीदवार ही चयनित हो पाए। दिग्विजय ने इसे भर्ती प्रणाली की विफलता बताते हुए कहा कि यदि इतनी बड़ी संख्या में पद खाली रह जाते हैं, तो इसका सीधा नुकसान प्रदेश के छात्रों और बेरोजगार युवाओं को होता है।
जेजेपी नेता ने हिंदी विषय की भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के 67 पदों में से सात पद खाली छोड़ दिए गए, जबकि 41 पदों पर बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों का चयन किया गया। उनके अनुसार हरियाणा के युवाओं को प्राथमिकता नहीं देना प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं के साथ अन्याय है।
दिग्विजय चौटाला ने कहा कि इससे पहले अंग्रेजी विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर के 613 पदों के लिए केवल 151 उम्मीदवारों को ही शॉर्टलिस्ट किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की चयन प्रक्रिया इतनी कठिन और अस्पष्ट बना दी गई है कि बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थी बाहर हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के लाखों युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन जब भर्ती निकलती है तो या तो पद कम होते हैं या चयन प्रक्रिया विवादों में घिर जाती है। इससे युवाओं का सरकारी व्यवस्था से भरोसा उठता जा रहा है।
जेजेपी नेता ने मांग की कि भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और युवाओं के हित में बनाया जाए। साथ ही खाली पदों को जल्द भरने और हरियाणा के युवाओं को प्राथमिकता देने की नीति लागू की जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने रोजगार के मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखाई तो आने वाले समय में युवा सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।




