पंचकूला प्लॉट आवंटन केस में भूपेंद्र हुड्डा पर केस चलाने की मंजूरी, ईडी ने भूमिका पर उठाए सवाल

पंचकूला प्लॉट आवंटन केस में भूपेंद्र हुड्डा पर केस चलाने की मंजूरी, ईडी ने भूमिका पर उठाए सवाल

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से जुड़ा पंचकूला औद्योगिक प्लॉट आवंटन मामला अब और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। सरकार की ओर से मुकदमा चलाने की मंजूरी मिलने के बाद जांच एजेंसियों की कार्रवाई और तेज हो गई है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी जांच में हुड्डा को इस कथित घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता बताया है। एजेंसी का कहना है कि प्लॉट आवंटन प्रक्रिया में शीर्ष स्तर पर हस्तक्षेप कर नियमों में बदलाव किए गए, जिससे चयन प्रक्रिया प्रभावित हुई।

इस केस में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिससे मामला और संवेदनशील बन गया है। ईडी की प्रोसिक्यूशन शिकायत में दावा किया गया है कि आवंटन प्रक्रिया को इस तरह बदला गया, जिससे कुछ खास लोगों को फायदा मिल सके।

जांच के मुताबिक, पात्रता से जुड़े मानकों में बदलाव कर ‘अनुभव’ और ‘योग्यता’ को कम अहमियत दी गई, जबकि इंटरव्यू प्रक्रिया को ज्यादा महत्व दिया गया। ‘वित्तीय क्षमता’ के अंक घटाकर और ‘वाइवा-वोचे’ के अंक बढ़ाकर चयन में लचीलापन बढ़ाया गया, जिससे निर्णय लेने की शक्ति इंटरव्यू बोर्ड के पास ज्यादा हो गई।

एजेंसी का आरोप है कि इस प्रक्रिया का लाभ ऐसे आवंटियों को मिला, जिनके पास जरूरी अनुभव या आर्थिक मजबूती नहीं थी। साथ ही, कई लाभार्थियों के संबंध राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों या हुड्डा के करीबी दायरे से जुड़े बताए गए हैं।

मामले में सैकड़ों आवेदनों के बावजूद सीमित संख्या में ही प्लॉट दिए गए। जांच में यह भी सामने आया कि जिन प्लॉटों का बाजार मूल्य काफी अधिक था, उन्हें बेहद कम कीमत पर आवंटित किया गया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा।

फिलहाल, इस पूरे मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और आने वाले समय में इसमें और कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।