चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े करोड़ों रुपये के एफडी और बैंक खातों के कथित घोटाले में जांच तेज हो गई है। मामले की पड़ताल कर रही सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को नगर निगम प्रशासन ने मांगे गए सभी जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड सौंप दिए हैं। अब जांच एजेंसी वित्तीय लेन-देन, बैंकिंग प्रक्रियाओं और अधिकारियों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है।
जानकारी के मुताबिक सीबीआई ने नगर निगम कमिश्नर को नोटिस जारी कर विस्तृत रिकॉर्ड तलब किया था। इसके बाद नगर निगम प्रशासन ने तय समय सीमा के भीतर 20 अहम बिंदुओं से जुड़े दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और अन्य जानकारियां एजेंसी को उपलब्ध करवा दीं। जांच के दायरे में करोड़ों रुपये की एफडीआर, बैंक खातों के संचालन, फंड ट्रांसफर और वित्तीय मंजूरियों की पूरी प्रक्रिया शामिल है।
सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी ने बर्खास्त अकाउंटेंट अनुभव मिश्रा, स्मार्ट सिटी लिमिटेड की पूर्व वित्त अधिकारी नलिनी मलिक और पूर्व ज्वाइंट कमिश्नर गुरिंदर सिंह सोढ़ी से जुड़े सेवा रिकॉर्ड, नियुक्ति आदेश, पोस्टिंग डिटेल, हस्ताक्षर और हैंडराइटिंग सैंपल भी मांगे हैं। इनके अलावा उन अधिकारियों और कर्मचारियों की जानकारी भी जुटाई जा रही है, जो संबंधित अवधि में इनके साथ कार्यरत थे।
सीबीआई विशेष रूप से करीब 108.73 करोड़ रुपये की 11 एफडीआर के पूरे रिकॉर्ड की जांच कर रही है। एजेंसी ने विभिन्न बैंकों को खाते बंद करने के लिए भेजे गए पत्र, इंटरनेट बैंकिंग एक्सेस से जुड़े विवरण, ओटीपी लिंक डिवाइस, चेकबुक कस्टडी रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट भी तलब किए हैं। इसके साथ ही ऑडिट रिपोर्ट, ईआरपी और टैली डेटा, आधिकारिक ईमेल कम्युनिकेशन और फंड ट्रांसफर आदेशों की भी पड़ताल की जा रही है।
बताया जा रहा है कि यूटी प्रशासन द्वारा मामला सीबीआई को सौंपे जाने के बाद आर्थिक अपराध शाखा ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। अब एजेंसी इस पूरे मामले में यह पता लगाने में जुटी है कि बैंकिंग प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताएं किस स्तर पर हुईं और इसमें किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आने वाले दिनों में कई अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं नगर निगम और स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़े वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल उठने लगे हैं।



