मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ रहे तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और केंद्र सरकार की मितव्ययिता नीति के बीच हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक खर्चों में कटौती की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार अब सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और मंत्रियों के विदेश दौरों पर सख्त नियंत्रण की तैयारी में जुट गई है। इसी नीति के तहत कई प्रस्तावित विदेशी यात्राएं फिलहाल रोक दी गई हैं, जबकि नई मंजूरी प्रक्रिया लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में विदेश यात्रा की अनुमति केवल उन्हीं मामलों में दी जाएगी, जहां यात्रा को सरकारी हित में अत्यंत जरूरी माना जाएगा। सरकार का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में अनावश्यक खर्चों पर अंकुश लगाना जरूरी है, ताकि सार्वजनिक धन का इस्तेमाल प्राथमिक विकास कार्यों और जरूरी योजनाओं पर किया जा सके।
इसी बीच शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल का प्रस्तावित जापान दौरा भी रद्द कर दिया गया है। वे अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव से जुड़े कार्यक्रम के सिलसिले में जापान जाने वाले थे, लेकिन राज्य सरकार की नई वित्तीय अनुशासन नीति के चलते इस यात्रा को मंजूरी नहीं मिल सकी। मंत्री ने स्वयं इस फैसले की पुष्टि की है।
जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कार्यालय से जुड़े कुछ अन्य अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भी विदेश यात्रा के लिए आवेदन किए थे, लेकिन उन्हें भी हरी झंडी नहीं मिली। सरकार फिलहाल सभी विदेशी दौरों की आवश्यकता और औचित्य की समीक्षा कर रही है।
उधर, ऊर्जा एवं श्रम मंत्री अनिल विज के विभाग में भी कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने निजी खर्च पर विदेश जाने की अनुमति मांगी थी। हालांकि विभागीय स्तर पर इन मामलों को भी फिलहाल लंबित रखा गया है। माना जा रहा है कि मुख्य सचिव कार्यालय की नई गाइडलाइन जारी होने तक किसी भी विदेशी दौरे पर अंतिम फैसला नहीं लिया जाएगा।
सरकारी हलकों में चर्चा है कि हरियाणा सरकार जल्द ही एक ऐसी नीति लागू कर सकती है, जिसमें विदेश यात्राओं के लिए कड़े मानक तय किए जाएंगे। इसमें यात्रा का उद्देश्य, सरकारी लाभ, खर्च का स्रोत और दौरे की अनिवार्यता जैसे पहलुओं की विस्तार से जांच की जाएगी। सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक खर्चों को सीमित कर वित्तीय अनुशासन को मजबूत करना बताया जा रहा है।




