उत्तराखंड में स्थित पवित्र गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब की वार्षिक यात्रा का आगाज हो गया है। मंगलवार को ऋषिकेश से श्रद्धालुओं का पहला जत्था पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ रवाना किया गया। पंज प्यारों की अगुवाई में निकले इस जत्थे को दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने हरी झंडी दिखाकर यात्रा के लिए रवाना किया।
यात्रा के शुभारंभ के दौरान गुरुद्वारा परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। श्रद्धालुओं में खासा उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला। हालांकि उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह कार्यक्रम में शामिल होने वाले थे, लेकिन प्रदेश में राजकीय शोक घोषित होने के कारण वे समारोह में नहीं पहुंच सके।
गुरुद्वारा प्रबंधन ट्रस्ट की ओर से जानकारी दी गई है कि 23 मई 2026 को हेमकुंड साहिब के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। यात्रा को सुगम बनाने के लिए प्रशासन और ट्रस्ट द्वारा रुकने, भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं।
करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब सिख धर्म के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में गिना जाता है। हर साल भारी बर्फबारी के चलते सर्दियों में यहां के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, जबकि गर्मियों में मौसम साफ होने के बाद यात्रा दोबारा शुरू होती है। इस बार भी मई से यात्रा आरंभ होकर अक्टूबर तक चलने की संभावना है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थान सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह की तपस्थली माना जाता है। ‘दसम ग्रंथ’ में भी इस पवित्र स्थल का उल्लेख मिलता है। कठिन पहाड़ी रास्तों और चुनौतीपूर्ण मौसम के बावजूद हर साल हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर मत्था टेकते हैं और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं।




