चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी स्कैम में बड़ा मोड़: पूर्व CFO नलिनी मलिक ने मांगा माफ़ी गवाह बनने का मौका

चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी स्कैम में बड़ा मोड़: पूर्व CFO नलिनी मलिक ने मांगा माफ़ी गवाह बनने का मौका

चंडीगढ़ में सामने आए बहुचर्चित स्मार्ट सिटी घोटाले की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। 116.84 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार पूर्व चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नलिनी मलिक ने अब सरकारी गवाह बनने की इच्छा जताई है। उन्होंने बुड़ैल जेल से सीबीआई कोर्ट को अर्जी भेजकर दावा किया है कि यदि उन्हें माफ़ी गवाह बनाया जाता है तो वह पूरे घोटाले से जुड़े कई अहम राज उजागर कर सकती हैं।

सूत्रों के अनुसार, नलिनी मलिक ने अपनी अर्जी में नगर निगम, स्मार्ट सिटी लिमिटेड और बैंकिंग नेटवर्क से जुड़े कई अधिकारियों की भूमिका पर महत्वपूर्ण जानकारी देने की बात कही है। अदालत ने इस आवेदन पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जवाब मांगा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसी उन्हें सरकारी गवाह बनाने पर सहमत होती है या नहीं।

यह मामला लगभग दो महीने पहले उस समय सामने आया था, जब स्मार्ट सिटी लिमिटेड और चंडीगढ़ रीन्यूल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसायटी (CREST) के फंड में भारी गड़बड़ी का खुलासा हुआ। शुरुआती जांच चंडीगढ़ पुलिस ने शुरू की थी, जिसमें करोड़ों रुपये की वित्तीय हेराफेरी और फर्जी निवेश की बात सामने आई। बाद में गृह मंत्रालय के आदेश पर यह केस सीबीआई को सौंप दिया गया।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से जुड़ी बड़ी रकम आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में एफडी के रूप में जमा थी। प्रोजेक्ट समाप्त होने के बाद यह राशि नगर निगम के खाते में ट्रांसफर की जानी थी, लेकिन आरोप है कि बैंक अधिकारियों और कुछ सरकारी अफसरों की मिलीभगत से इस धनराशि को शेल कंपनियों के माध्यम से रियल एस्टेट कारोबार में लगा दिया गया।

हैरानी की बात यह रही कि जिन खातों में करोड़ों रुपये पहुंचने थे, वहां केवल 81.20 रुपये ट्रांसफर हुए। जांच में यह भी सामने आया कि रकम के गबन को छिपाने के लिए 11 फर्जी एफडी तैयार की गईं। आरोप है कि इस पूरे खेल में बैंक अधिकारियों ने कई प्रभावशाली अधिकारियों तक रिश्वत के रूप में करोड़ों रुपये पहुंचाए।

नलिनी मलिक को 2 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल जेल में बंद हैं। उन्होंने मेडिकल आधार पर जमानत याचिका भी दायर की है, जिस पर 26 मई को सुनवाई प्रस्तावित है। इस मामले में कई बैंक कर्मचारी भी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि कुछ बड़े अधिकारियों की भूमिका अभी जांच के दायरे में है।

सीबीआई अब वित्तीय लेनदेन, फर्जी कंपनियों और संदिग्ध निवेश की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। यदि नलिनी मलिक सरकारी गवाह बनती हैं, तो जांच में कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।