पंजाब में होने वाले नगर निकाय चुनावों से पहले ईवीएम बनाम बैलेट पेपर का विवाद अब कानूनी और प्रशासनिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन गया है। गुरुवार को Punjab and Haryana High Court में इस मामले पर लंबी और तीखी सुनवाई हुई, जहां पंजाब राज्य चुनाव आयोग और भारतीय चुनाव आयोग ने एक-दूसरे पर लापरवाही, देरी और समन्वय की कमी के गंभीर आरोप लगाए। बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
सुनवाई के दौरान पंजाब राज्य चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि वह शुरुआत से ही एम-2 मॉडल की ईवीएम की मांग कर रहा था, क्योंकि राज्य में पूर्व में इन्हीं मशीनों का इस्तेमाल होता रहा है और चुनावी स्टाफ को उसी आधार पर प्रशिक्षण दिया गया था। आयोग के मुताबिक बाद में यह जानकारी दी गई कि एम-2 मशीनें अपनी निर्धारित अवधि पूरी कर चुकी हैं और अब केवल एम-3 मॉडल की ईवीएम ही उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इससे पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई और तकनीकी जांच, फर्स्ट लेवल चेकिंग तथा कमीशनिंग जैसी प्रक्रियाओं के कारण समय की कमी पैदा हो गई।
राज्य चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि उसने समय रहते भारतीय चुनाव आयोग, पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और कई राज्यों से ईवीएम उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। हरियाणा सहित अन्य राज्यों से संपर्क भी किया गया, लेकिन मशीनों की उपलब्धता और परिवहन समय पर पूरा नहीं हो पाया। आयोग का तर्क था कि अब चुनाव बेहद नजदीक हैं और 26 मई को मतदान होना तय है, ऐसे में बैलेट पेपर ही व्यवहारिक विकल्प बचता है।
अदालत को यह भी बताया गया कि लगभग 36 लाख मतदाताओं के लिए बैलेट पेपरों की छपाई शुरू की जा चुकी है और अब तक इस प्रक्रिया पर 40 से 50 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। राज्य चुनाव आयोग ने कहा कि पोलिंग स्टाफ की ट्रेनिंग, मशीनों की सीलिंग, राजनीतिक दलों की मौजूदगी में मॉक ड्रिल और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं के लिए पर्याप्त समय नहीं बचा है। नोडल अधिकारियों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि मशीनों की जांच और तैयारी में कम से कम 10 से 12 दिन लगेंगे।
वहीं भारतीय चुनाव आयोग ने इन दलीलों का कड़ा विरोध किया। आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि देरी पूरी तरह पंजाब राज्य चुनाव आयोग की वजह से हुई। भारतीय चुनाव आयोग ने कहा कि ईवीएम उधार लेने की प्रक्रिया छह महीने पहले शुरू की जानी चाहिए थी, जबकि पंजाब ने जनवरी 2026 में इस दिशा में कदम उठाए।
निर्वाचन आयोग ने अदालत को जानकारी दी कि राजस्थान से करीब 6300 बैलेट यूनिट और लगभग 5980 कंट्रोल यूनिट पंजाब भेज दी गई हैं और वे देर रात तक पहुंच जाएंगी। आयोग का दावा था कि अब मशीनों की कोई कमी नहीं है और पूरी तकनीकी प्रक्रिया एक दिन में पूरी की जा सकती है।
भारतीय चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारी पहले से प्रशिक्षित होते हैं और नई मशीनों की जानकारी देने में महज 15 मिनट का समय लगता है। आयोग ने अदालत को भरोसा दिलाया कि फर्स्ट लेवल चेकिंग और कमीशनिंग की प्रक्रिया में पूरा सहयोग दिया जाएगा ताकि तय समय पर ईवीएम से मतदान कराया जा सके।
सुनवाई के दौरान माहौल उस समय हल्का हो गया जब एक पक्ष की ओर से टिप्पणी की गई कि यह मामला “ऐसे रिश्ते” जैसा बन गया है, जहां पहले कई शर्तें रखी गईं और अब सारी व्यवस्थाएं होने के बावजूद “शादी” से इनकार किया जा रहा है। इस टिप्पणी पर अदालत में हल्की मुस्कान भी देखने को मिली।
अब सभी की नजर हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है, क्योंकि अदालत का निर्णय यह तय करेगा कि पंजाब के नगर निकाय चुनाव ईवीएम से होंगे या फिर पारंपरिक बैलेट पेपर के जरिए।




