क्यों तप रहा है भारत? हर साल रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के पीछे क्या हैं बड़े कारण

क्यों तप रहा है भारत? हर साल रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के पीछे क्या हैं बड़े कारण

देशभर में इस बार गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालात ऐसे हैं कि दिन के साथ-साथ रातों में भी राहत नहीं मिल रही। वैश्विक तापमान से जुड़े रियल टाइम आंकड़े बताते हैं कि दुनिया के सबसे गर्म शहरों की सूची में बड़ी संख्या भारत के शहरों की है। उत्तर भारत से लेकर मध्य और पूर्वी हिस्सों तक लू का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। खासकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, विदर्भ, तेलंगाना, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में हालात ज्यादा गंभीर बने हुए हैं।

हाल ही में प्रकाशित कई जलवायु अध्ययनों में यह सामने आया है कि भारत में हीटवेव पहले की तुलना में ज्यादा लंबी और खतरनाक हो गई हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि बीते दो दशकों में गर्मी के नए हॉटस्पॉट तैयार हुए हैं और एल नीनो जैसी मौसमी घटनाएं इसे और ज्यादा बढ़ा रही हैं। यही वजह है कि अप्रैल शुरू होते ही तापमान तेजी से चढ़ने लगता है और मई-जून तक हालात बेहद कठिन हो जाते हैं।

हर साल क्यों बढ़ रही है गर्मी?

उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में स्थित है भारत

भारत की भौगोलिक स्थिति इसकी सबसे बड़ी वजह मानी जाती है। देश का बड़ा हिस्सा उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में आता है, जहां सूर्य की किरणें सीधे पड़ती हैं। इससे तापमान तेजी से बढ़ता है। वहीं राजस्थान का थार मरुस्थल गर्मियों में अत्यधिक तपता है और वहां से चलने वाली गर्म हवाएं उत्तर भारत के बड़े हिस्से को लू की चपेट में ले लेती हैं।

तेजी से बढ़ता शहरीकरण

बड़े शहरों में कंक्रीट, ऊंची इमारतें और डामर की सड़कें गर्मी को लंबे समय तक रोककर रखती हैं। इस कारण शहरों में “हीट आइलैंड इफेक्ट” तेजी से बढ़ रहा है। दिल्ली, अहमदाबाद और नागपुर जैसे शहरों में तापमान आसपास के ग्रामीण इलाकों से कई डिग्री ज्यादा रिकॉर्ड किया जा रहा है। पेड़ों और खुले क्षेत्रों की कमी भी इस समस्या को और बढ़ा रही है।

जंगलों की कटाई ने बिगाड़ा संतुलन

वनों को प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम माना जाता है, लेकिन लगातार कटाई के कारण यह संतुलन टूट रहा है। औद्योगिक विस्तार, सड़क निर्माण और कृषि क्षेत्र बढ़ने से हरित क्षेत्र कम हो रहे हैं। इसका सीधा असर तापमान पर पड़ता है और लू पहले से ज्यादा तीखी महसूस होती है।

ग्लोबल वार्मिंग का बढ़ता असर

पिछला दशक भारत के लिए सबसे गर्म दशकों में शामिल रहा है। वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे धरती का तापमान ऊपर जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार महासागर भी तेजी से गर्म हो रहे हैं और इसका असर मौसम चक्र पर साफ दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि अब गर्मी के रिकॉर्ड बार-बार टूट रहे हैं।

मानसून में देरी और एल नीनो

मानसून के देर से पहुंचने पर गर्म हवाओं का असर लंबे समय तक बना रहता है। एल नीनो के दौरान बारिश कम होती है और सूखे जैसे हालात पैदा होते हैं। इससे जमीन ज्यादा गर्म होती है और तापमान सामान्य से कहीं ऊपर चला जाता है।

बढ़ती ऊर्जा खपत भी जिम्मेदार

एसी, वाहन, फैक्ट्रियां और बिजली की बढ़ती मांग भी गर्मी बढ़ाने में भूमिका निभा रही हैं। ठंडक देने वाले उपकरण बाहर गर्म हवा छोड़ते हैं, जिससे शहरों का तापमान और बढ़ जाता है। औद्योगिकीकरण के कारण ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन भी तेजी से बढ़ा है।

सिर्फ असहजता नहीं, जान का भी खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी अब स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। लू लगने से हर साल हजारों लोगों की जान जा रही है। मजदूरों, किसानों और खुले में काम करने वाले लोगों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है। इसके अलावा खेती की पैदावार घटने, स्वास्थ्य खर्च बढ़ने और कामकाजी घंटों में कमी आने से अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है।

मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो आने वाले वर्षों में हीटवेव के दिन और बढ़ सकते हैं। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण, हरित क्षेत्र बढ़ाने और प्रदूषण कम करने जैसे कदम अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गए हैं।

(Photo : AI Generated)