देश के सबसे योजनाबद्ध शहरों में गिने जाने वाले चंडीगढ़ में अब विकास का नया दौर शुरू होने जा रहा है। शहर के मास्टर प्लान में पहली बार व्यापक बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यूटी प्रशासन ने मास्टर प्लान-2031 में बड़े संशोधनों का ड्राफ्ट जारी करते हुए संकेत दिए हैं कि आने वाले वर्षों में चंडीगढ़ का शहरी ढांचा, आवासीय मॉडल, पार्किंग व्यवस्था, औद्योगिक क्षेत्र और व्यावसायिक गतिविधियां पूरी तरह बदल सकती हैं।
प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की मंजूरी के बाद जारी किए गए इस ड्राफ्ट का उद्देश्य तेजी से बढ़ती आबादी, सीमित भूमि संसाधनों और आधुनिक शहरी जरूरतों के बीच संतुलन बनाना बताया गया है। प्रशासन का कहना है कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए शहर को अधिक स्मार्ट, सुविधाजनक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में यह सबसे बड़ा कदम है।
सेक्टर-30 के बाद बदलेगा शहर का स्काईलाइन
ड्राफ्ट संशोधनों में सबसे बड़ा बदलाव फेज-2 और फेज-3 क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। प्रशासन ने सेक्टर-30 से आगे हाईराइज सरकारी आवासीय परियोजनाओं को बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही बाहरी क्षेत्रों में ग्रुप हाउसिंग और आधुनिक अपार्टमेंट संस्कृति को भी बढ़ावा देने की योजना है। माना जा रहा है कि इससे शहर में बढ़ती आवासीय मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी और जमीन का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
पंचकूला मॉडल पर पार्किंग व्यवस्था
शहर में लगातार बढ़ रही पार्किंग समस्या को देखते हुए प्रशासन अब स्टिल्ट पार्किंग और बेसमेंट पार्किंग की अनुमति देने की तैयारी में है। यह मॉडल पहले से पंचकूला में लागू है, जहां स्टिल्ट प्लस चार मंजिल तक निर्माण की अनुमति है। अधिकारियों का मानना है कि इससे सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा और ट्रैफिक प्रबंधन में सुधार आएगा।
खाली जमीन पर होगा सुनियोजित विकास
इंडस्ट्रियल एरिया फेज-3, आईटी हैबिटेट, मिक्स्ड लैंड यूज बेल्ट और शहर के बाहरी इलाकों की खाली जमीन के उपयोग को लेकर भी नई रणनीति बनाई गई है। प्रशासन चाहता है कि हर उपलब्ध भूखंड का योजनाबद्ध तरीके से इस्तेमाल हो, ताकि भविष्य में शहर को अनियोजित विस्तार का सामना न करना पड़े।
विकास मार्ग और सेक्टर-43 का बदलेगा स्वरूप
ड्राफ्ट में विकास मार्ग और सेक्टर-43 स्थित सब-सिटी सेंटर के आसपास मिश्रित भूमि उपयोग (मिक्स्ड लैंड यूज) कॉरिडोर के विस्तार का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके जरिए व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने, रोजगार बढ़ाने और “वॉक टू वर्क” संस्कृति विकसित करने की योजना बनाई गई है। अधिकारियों के मुताबिक इससे लोगों को घर के नजदीक ही रोजगार और सुविधाएं मिल सकेंगी।
उद्योगों और स्टार्टअप को मिलेगा बड़ा फायदा
औद्योगिक क्षेत्रों में फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) बढ़ाने का प्रस्ताव भी काफी अहम माना जा रहा है। इससे उद्योगों, स्टार्टअप कंपनियों और व्यापारिक संस्थानों को अधिक स्पेस मिल सकेगा। प्रशासन का मानना है कि यह कदम ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करेगा और निवेश आकर्षित करने में मददगार साबित होगा।
शिक्षा और स्वास्थ्य ढांचे पर भी फोकस
ड्राफ्ट में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, छात्रावास और अन्य संस्थागत भवनों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भी कई बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि मौजूदा ढांचा भविष्य की आबादी और जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त नहीं है, इसलिए आधुनिक सुविधाओं के अनुरूप विस्तार जरूरी हो गया है।
विरासत भी रहेगी सुरक्षित
हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि विकास की इस नई योजना में शहर की मूल पहचान और विरासत से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। खास तौर पर फेज-1 के सेक्टर 1 से 30 तक की मूल वास्तुकला और नियोजित संरचना को सुरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया गया है।
लोगों से मांगे गए सुझाव और आपत्तियां
यूटी प्रशासन ने इस ड्राफ्ट को सार्वजनिक सुझावों और आपत्तियों के लिए जारी कर दिया है। अधिसूचना जारी होने के बाद 21 दिनों तक लोग लिखित रूप में अपनी राय दे सकेंगे। इसके लिए मुख्य वास्तुकार कार्यालय, शहरी नियोजन विभाग, सेक्टर-9 सहित कई सरकारी कार्यालयों में दस्तावेज निरीक्षण के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही ऑनलाइन माध्यम से भी सुझाव भेजे जा सकते हैं।
चंडीगढ़ की प्लानिंग का सफर
- 1951 में शहर की मूल योजना तैयार हुई थी।
- 2013 में मास्टर प्लान-2031 का ड्राफ्ट सामने आया।
- 2015 में मास्टर प्लान-2031 लागू किया गया।
- 2026 में पहली बार इतने बड़े स्तर पर संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं।




