मलोया के समाधान शिविर में खुली प्रशासनिक व्यवस्था की पोल, कटारिया ने अधिकारियों को लगाई फटकार

मलोया के समाधान शिविर में खुली प्रशासनिक व्यवस्था की पोल, कटारिया ने अधिकारियों को लगाई फटकार

चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा लोगों की समस्याओं का मौके पर समाधान करने के उद्देश्य से लगाए जा रहे “समाधान शिविर” में उस समय असहज स्थिति बन गई, जब मलोया में आयोजित शिविर के दौरान प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जतानी पड़ी। लोगों की शिकायतें सुनने पहुंचे प्रशासक ने पाया कि कम्युनिटी सेंटर के भीतर शिकायतकर्ताओं से ज्यादा प्रशासनिक स्टाफ बैठा हुआ था, जबकि बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी बाहर तेज धूप में अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।

हॉल में स्टाफ, बाहर जनता

मलोया के छोटे कम्युनिटी सेंटर में आयोजित इस शिविर में आधे हिस्से में अधिकारियों और कर्मचारियों को बैठा दिया गया था। शिकायत लेकर आए लोगों को सीमित जगह दी गई, जिसके कारण कई बुजुर्ग, महिलाएं और अन्य लोग बाहर खड़े रहे। जब प्रशासक कटारिया ने लगातार एक ही दिशा से सवाल आने पर दूसरी ओर बैठे लोगों से बातचीत करने को कहा, तब अधिकारियों ने बताया कि वहां विभागीय स्टाफ बैठा है।

इस पर प्रशासक ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि यदि जनता की समस्याएं सुनने के लिए शिविर लगाया गया है तो हॉल में जनता की जगह कर्मचारियों को क्यों बैठाया गया। उन्होंने तुरंत स्टाफ को हटाने और बाहर खड़े लोगों को अंदर बुलाने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने आनन-फानन में व्यवस्था बदलनी पड़ी।

“जनता के लिए शिविर, कर्मचारियों के लिए नहीं”

कटारिया ने स्पष्ट कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को राहत देना है, न कि औपचारिक उपस्थिति दिखाना। उन्होंने अधिकारियों को भविष्य में बेहतर प्रबंधन करने की हिदायत दी। गर्मी को देखते हुए शिविर को बंद हॉल में रखा गया था, लेकिन जगह कम पड़ने से अव्यवस्था बढ़ गई।

उन्होंने लोगों से भी अपील की कि अपनी शिकायत रखने के बाद वे बाहर निकल जाएं ताकि दूसरे लोगों को भी मौका मिल सके। प्रशासक ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचना है और इसके लिए व्यवस्था पारदर्शी और सुविधाजनक होनी चाहिए।

स्कूलों और खेल सुविधाओं को लेकर लोगों में नाराजगी

शिविर में स्थानीय निवासियों ने मलोया के सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति का मुद्दा भी उठाया। लोगों ने कहा कि यहां के स्कूलों में शिक्षकों की कमी है और कई कक्षाओं को एक ही शिक्षक पढ़ा रहा है। एक-एक सेक्शन में 60 तक बच्चे बैठ रहे हैं, जबकि सीबीएसई मानकों के अनुसार संख्या इससे काफी कम होनी चाहिए।

लोगों ने यह भी शिकायत की कि खेल सुविधाओं की हालत बेहद खराब है। बास्केटबॉल कोर्ट पर महीनों से टूटा फर्नीचर पड़ा हुआ है और मैदानों में घास इतनी बढ़ चुकी है कि बच्चे वहां खेलने से कतराते हैं। कई अभिभावकों ने कहा कि वे मजबूरी में अपने बच्चों को दूसरे सेक्टरों के स्कूलों में भेज रहे हैं।

इन शिकायतों पर प्रशासक ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से जवाब मांगा और सुधार के लिए एक महीने की समयसीमा तय कर दी। उन्होंने कहा कि इसके बाद वह स्वयं स्कूलों का दौरा करेंगे और अभिभावकों तथा शिक्षकों के साथ बैठक करेंगे।

आंगनवाड़ी कर्मियों की रुकी तनख्वाह पर भी सवाल

शिविर के दौरान आंगनवाड़ी वर्करों ने चार महीने से वेतन नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। इस पर प्रशासक ने समाज कल्याण विभाग की सचिव से पूछा कि यदि किसी अधिकारी की चार महीने तक सैलरी रुक जाए तो उसे कैसा लगेगा। अधिकारियों ने जवाब दिया कि केंद्र से फंड जारी होने में देरी के कारण भुगतान अटका हुआ है और जल्द राशि जारी कर दी जाएगी।

युवाओं ने उठाई खेल मैदान और नशे की चिंता

स्थानीय युवाओं ने कहा कि इलाके में खेल मैदान और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की कमी के कारण बच्चे और युवा गलत गतिविधियों की ओर बढ़ रहे हैं। एक खिलाड़ी ने बताया कि उसे अभ्यास के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। लोगों ने खेल सुविधाओं के साथ-साथ नशे पर रोक लगाने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी रखी।

इस पर कटारिया ने आश्वासन दिया कि मलोया क्षेत्र को अगले एक वर्ष में खेल मैदान उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।

सड़क, पानी, सफाई और किराए के मुद्दे भी उठे

शिविर में पेयजल, बिजली, स्ट्रीट लाइट, सीवरेज, सफाई व्यवस्था, सड़कें और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी शिकायतें भी बड़ी संख्या में सामने आईं। पंजाब सीमा से सटे इलाके होने के कारण लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था और नशा नियंत्रण को लेकर चिंता जताई।

कई निवासियों ने पीआर-5 रोड के विस्तार और बेहतर कनेक्टिविटी की मांग रखी। वहीं, हाउसिंग से जुड़े मामलों में लोगों ने बकाया किराए पर लग रहे भारी ब्याज को लेकर राहत मांगी। प्रशासक ने कहा कि किराया जमा करते रहें, ब्याज के मामले पर कमेटी फैसला करेगी।

84 शिकायतें दर्ज, कई मामलों का मौके पर निपटारा

मलोया समाधान शिविर में कुल 84 शिकायतें और आवेदन प्रशासन के पास पहुंचे। कई मामलों का मौके पर ही समाधान किया गया, जबकि अन्य शिकायतों को संबंधित विभागों को भेजा गया है।

प्रशासक ने बताया कि पहले आयोजित शिविरों में भी कार्रवाई जारी है। डड्डूमाजरा शिविर की अधिकांश शिकायतों का समाधान हो चुका है, जबकि हल्लोमाजरा के कई मामलों पर विभाग काम कर रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि समाधान शिविरों के जरिए लोगों की समस्याओं को सीधे अधिकारियों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।