पंजाब की राजनीति में दल बदल और सुरक्षा वापसी को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सांसद Rajendra Gupta ने अब अपनी सुरक्षा हटाए जाने के खिलाफ Punjab and Haryana High Court का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने पंजाब सरकार पर राजनीतिक दुर्भावना के तहत कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए सुरक्षा बहाल करने की मांग की है।
याचिका में राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि उन्हें पहले खतरे के आकलन के आधार पर पंजाब पुलिस की ओर से सुरक्षा दी गई थी। यह सुरक्षा किसी राजनीतिक पद या पार्टी से जुड़ी नहीं थी, बल्कि उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा आवश्यकताओं को देखते हुए उपलब्ध कराई गई थी। लेकिन भाजपा में शामिल होने के तुरंत बाद सरकार ने उनकी सुरक्षा वापस लेने का फैसला कर लिया।
उन्होंने अदालत को बताया कि राजनीतिक विचारधारा बदलने से किसी व्यक्ति के सुरक्षा खतरे खत्म नहीं हो जाते। उनके अनुसार आज भी उन्हें वही जोखिम बना हुआ है, जिसके आधार पर पहले सुरक्षा दी गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार ने निष्पक्ष सुरक्षा समीक्षा किए बिना केवल राजनीतिक कारणों से यह कदम उठाया।
राजेंद्र गुप्ता ने हाई कोर्ट से मांग की है कि सुरक्षा वापसी से जुड़े आदेशों को रद्द किया जाए और पंजाब पुलिस को निर्देश दिए जाएं कि पहले की तरह उनकी सुरक्षा तुरंत प्रभाव से बहाल की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन के खिलाफ है।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाल के दिनों में आम आदमी पार्टी छोड़ने वाले नेताओं और सांसदों की सुरक्षा में कटौती को लेकर कई सवाल उठे हैं। इससे पहले पूर्व भारतीय क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद Harbhajan Singh ने भी सुरक्षा वापसी को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उस मामले के बाद अब राजेंद्र गुप्ता का अदालत पहुंचना राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है, क्योंकि विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि पंजाब में राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ प्रशासनिक फैसलों का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं सरकार की ओर से अब तक इस मामले पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
माना जा रहा है कि हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार से यह पूछा जा सकता है कि सुरक्षा वापस लेने का आधार क्या था और क्या इसके लिए कोई नई खतरा समीक्षा रिपोर्ट तैयार की गई थी। अदालत का आगामी रुख इस पूरे विवाद में अहम माना जा रहा है।




