अमेरिका-यूरोप व्यापार तनाव बढ़ा: ट्रंप के नए टैरिफ से अरबों का कारोबार खतरे में

अमेरिका-यूरोप व्यापार तनाव बढ़ा: ट्रंप के नए टैरिफ से अरबों का कारोबार खतरे में

यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक बार फिर खटास आ गई है। Donald Trump ने यूरोप से आयात होने वाले वाहनों पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जिससे दोनों पक्षों के बीच बड़े आर्थिक झटके की आशंका जताई जा रही है।

दरअसल, साल 2024 में दोनों के बीच करीब 1.7 लाख करोड़ यूरो का व्यापार हुआ था, जो रोजाना औसतन 4.6 अरब यूरो बैठता है। ऐसे में नए शुल्क से इस विशाल आर्थिक साझेदारी पर सीधा असर पड़ सकता है। यूरोपीय संघ का मानना है कि इस कदम से पहले हुए समझौतों का उल्लंघन हो सकता है।

पिछले साल Ursula von der Leyen और ट्रंप के बीच एक समझौता हुआ था, जिसे ‘टर्नबेरी डील’ कहा गया। इसमें ज्यादातर उत्पादों पर अधिकतम 15% टैरिफ तय किया गया था। इस व्यवस्था से यूरोपीय ऑटो कंपनियों को हर महीने 50 से 60 करोड़ यूरो तक की राहत मिलने की उम्मीद थी।

हालांकि, इस साल की शुरुआत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने इस समझौते को उलझा दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि राष्ट्रपति के पास आपातकाल का हवाला देकर टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है, जिससे शुल्क सीमा घटकर करीब 10% तक सीमित हो गई थी।

इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन ने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ और ‘व्यापार असंतुलन’ का हवाला देकर नए रास्ते तलाशे और अब 25% तक शुल्क बढ़ाने की घोषणा कर दी। ट्रंप का आरोप है कि European Union तय व्यापार नियमों का पालन नहीं कर रहा, हालांकि उन्होंने इसका विस्तृत कारण नहीं बताया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक दबाव की रणनीति भी हो सकता है, खासकर ईरान जैसे मुद्दों पर अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ते मतभेदों के संदर्भ में।