भारत के दिग्गज उद्योगपति और कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय कोटक ने देश के कारोबार जगत और नीति निर्माताओं को आने वाले समय के लिए सतर्क रहने की सलाह दी है। उनका मानना है कि ईरान में जारी संघर्ष का असर अब धीरे-धीरे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखाई देना शुरू होगा और भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा।
सीआईआई के वार्षिक बिजनेस समिट 2026 में बोलते हुए उदय कोटक ने कहा कि बीते कुछ हफ्तों में युद्ध का असर सीमित नजर आया, लेकिन अब दुनिया एक बड़े आर्थिक दबाव की तरफ बढ़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो वैश्विक बाजारों में बड़ा झटका देखने को मिल सकता है।
उदय कोटक के मुताबिक दुनिया अब सहयोग और खुले व्यापार वाली पुरानी “दावोस सोच” से हट रही है। अब देश रणनीतिक संपत्तियों, व्यापारिक मार्गों और जरूरी संसाधनों पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह माहौल 1945 से पहले की वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसा बनता जा रहा है।
उन्होंने मलक्का स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री मार्गों का जिक्र करते हुए कहा कि एआई और भू-राजनीतिक बदलावों के दौर में ऐसे ‘चोक पॉइंट्स’ बेहद संवेदनशील हो गए हैं। इन पर किसी भी तरह का तनाव दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकता है।
कोटक ने भारत की तेल पर निर्भरता को भी बड़ी चिंता बताया। उन्होंने कहा कि जब कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल रहती है तो चालू खाता घाटा संभालने योग्य होता है, लेकिन अगर यही कीमत 100 डॉलर तक पहुंचती है तो आर्थिक दबाव काफी बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत को आने वाले समय के लिए व्यावहारिक और रणनीतिक सोच अपनानी होगी। कारोबार जगत को कम लागत वाले पुनर्गठन और जोखिम प्रबंधन पर अभी से काम शुरू कर देना चाहिए।
उदय कोटक ने यह भी कहा कि संकट आने का इंतजार करने के बजाय पहले से तैयारी करना ज्यादा समझदारी होगी। उन्होंने समाज, उद्योग और सरकार से मिलकर सतर्क तरीके से काम करने की अपील की।
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लोगों से जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग्स और गैर-जरूरी यात्राओं में कमी जैसे कदम अपनाने की सलाह दे चुके हैं, ताकि वैश्विक संकट के असर को कम किया जा सके।




