चंडीगढ़ में जल्द मिलेगा जंगल सफारी का रोमांच, सुखना सेंक्चुरी पर प्रशासन का बड़ा प्लान

चंडीगढ़ में जल्द मिलेगा जंगल सफारी का रोमांच, सुखना सेंक्चुरी पर प्रशासन का बड़ा प्लान

चंडीगढ़ में रहने वालों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आने वाले समय में बड़ी सौगात मिल सकती है। शहर की पहचान बन चुकी सुखना लेक के आसपास फैली वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी को इको-टूरिज्म और जंगल सफारी के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। यदि प्रशासन की यह योजना अमल में आती है तो लोगों को वन्यजीवों और जंगल सफारी का रोमांच लेने के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

करीब 26 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली यह सेंक्चुरी इन दिनों जैव विविधता के लिहाज से काफी समृद्ध मानी जा रही है। हाल ही में हुए वन्यजीव सर्वेक्षण में यहां तेंदुओं की मौजूदगी दर्ज होने के बाद प्रशासन भी इस क्षेत्र को नए पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तलाश रहा है।

जंगल में बढ़ रही वन्यजीवों की गतिविधि

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार सुखना वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई दुर्लभ जीव-जंतुओं की गतिविधियां बढ़ी हैं। कैमरा ट्रैप में दो तेंदुओं की तस्वीरें सामने आने के बाद माना जा रहा है कि यहां उनका पूरा कुनबा मौजूद हो सकता है। इसके अलावा सांभर, नीलगाय, जंगली सूअर, बार्किंग डियर और जंगली बिल्ली जैसे जीव भी इस जंगल में देखे गए हैं।

पक्षियों की बड़ी संख्या भी इस इलाके को खास बनाती है। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक यहां 132 से अधिक प्रजातियों के पक्षी पाए गए हैं, जिनमें कुछ दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियां भी शामिल हैं। तितलियों और सरीसृपों की विविधता ने भी विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है।

ट्रैकिंग बंद, अब सफारी विकल्प पर जोर

सुरक्षा कारणों से पिछले करीब एक वर्ष से सेंक्चुरी में होने वाली वाइल्डलाइफ ट्रैकिंग बंद है। तेंदुओं की बढ़ती मौजूदगी के बाद प्रशासन ने आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी थी। इससे प्रकृति प्रेमियों और ट्रैकिंग करने वालों में निराशा है।

अब प्रशासन ट्रैकिंग की जगह नियंत्रित और सुरक्षित जंगल सफारी मॉडल पर काम कर रहा है, ताकि पर्यटक वन्यजीवों का आनंद भी ले सकें और सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित न हो। अधिकारियों का मानना है कि सीमित क्षेत्र में गाइडेड सफारी शुरू करना ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित विकल्प हो सकता है।

पहले भी बन चुकी है नाइट सफारी की योजना

चंडीगढ़ में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देने का विचार नया नहीं है। पूर्व प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने भी सिंगापुर की मशहूर नाइट सफारी की तर्ज पर यहां परियोजना विकसित करने की संभावना तलाशने के निर्देश दिए थे। इस संबंध में वन विभाग और छतबीड़ जू प्रबंधन के साथ चर्चा भी हुई थी।

हालांकि विशेषज्ञों ने शहर के भीतर बड़े स्तर की नाइट सफारी परियोजना को व्यवहारिक नहीं माना। इसके बाद प्रशासन ने प्राकृतिक जंगल क्षेत्र में सीमित सफारी मॉडल पर विचार शुरू किया।

पर्यटन और कारोबार को मिलेगा बढ़ावा

अगर जंगल सफारी प्रोजेक्ट शुरू होता है तो इसका फायदा केवल पर्यटन तक सीमित नहीं रहेगा। चंडीगढ़ पहले से ही हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और उत्तर भारत के कई हिल स्टेशनों का प्रमुख ट्रांजिट प्वाइंट माना जाता है। ऐसे में सफारी शुरू होने से पर्यटकों का शहर में ठहराव बढ़ सकता है।

होटल उद्योग, स्थानीय बाजार, रेस्टोरेंट और ट्रैवल सेक्टर को भी इसका आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। प्रशासन का मानना है कि यह प्रोजेक्ट चंडीगढ़ की पहचान को सिर्फ “सिटी ब्यूटीफुल” तक सीमित नहीं रहने देगा, बल्कि इसे इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में भी नई पहचान दिला सकता है।

नेचर लवर्स की मांग — जंगल से जुड़ाव बना रहे

पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि सेंक्चुरी को पूरी तरह प्रतिबंधित करने की बजाय नियंत्रित तरीके से लोगों के लिए खोला जाना चाहिए। उनका तर्क है कि प्रकृति से जुड़ाव बढ़ाने के लिए ऐसी गतिविधियां जरूरी हैं।

पहले नेपली गेट से कांसल तक होने वाली ट्रैकिंग में लोग जंगल की हरियाली, जल स्रोतों, पक्षियों और वन्यजीवों को करीब से देख पाते थे। अब इसके बंद होने से एडवेंचर और नेचर एक्टिविटी पसंद करने वाले लोग मायूस हैं।

सेंक्चुरी में जैव विविधता की झलक

वन्यजीव सर्वे में सुखना सेंक्चुरी में कई महत्वपूर्ण प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गई है—

  • 132 पक्षी प्रजातियां
  • 73 तितली प्रजातियां
  • 16 स्तनधारी जीव
  • 13 सरीसृप प्रजातियां
  • 79 प्रकार की वनस्पतियां

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र का संतुलित विकास किया जाए तो यह उत्तर भारत के प्रमुख इको-टूरिज्म स्पॉट्स में शामिल हो सकता है।