चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन को वर्ल्ड क्लास बनाने की योजना तय समय से पीछे चल रही है। पहले इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अप्रैल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन अब निर्माण कार्य अगस्त तक खिंचने की संभावना है।
करीब 462 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह स्टेशन रेलवे की प्रमुख आधुनिक परियोजनाओं में शामिल है। इसकी खासियत यह है कि स्टेशन के प्रवेश द्वार दो राज्यों—चंडीगढ़ और हरियाणा के पंचकूला—से जुड़े हुए हैं, जो इसे देश के अन्य स्टेशनों से अलग बनाते हैं।
यह प्रोजेक्ट Narendra Modi की प्राथमिकताओं में शामिल माना जाता है, और इसके पूरा होने के बाद उद्घाटन भी उनके हाथों होने की उम्मीद है। हालांकि निर्माण कार्य के दौरान लगातार ट्रेनों का संचालन जारी रहने से गति प्रभावित हुई है, जिससे तय समय सीमा आगे बढ़ गई।
रेलवे लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (RLDA) के तहत शुरू हुई इस परियोजना का काम अब अंतिम चरण में बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यात्रियों की आवाजाही को प्रभावित किए बिना निर्माण कार्य करना एक बड़ी चुनौती रही है।
नई सुविधाओं के साथ तैयार हो रहा यह स्टेशन ग्रीन बिल्डिंग मानकों के तहत विकसित किया जा रहा है और इसे प्लेटिनम रेटिंग के अनुरूप बनाया जा रहा है। साथ ही, यहां 1,350 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट भी स्थापित किया जा रहा है, जिससे स्टेशन की ऊर्जा जरूरतों को पर्यावरण अनुकूल तरीके से पूरा किया जाएगा।
पूरा स्टेशन प्रतिदिन करीब 90 हजार यात्रियों की क्षमता को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है, ताकि आने वाले कई वर्षों तक बढ़ती मांग को संभाला जा सके। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अगस्त तक यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से तैयार हो पाता है या नहीं।


