चीन-पाकिस्तान की डील से बढ़ी समुद्री ताकत, हिंद महासागर में भारत के लिए नई चुनौती

चीन-पाकिस्तान की डील से बढ़ी समुद्री ताकत, हिंद महासागर में भारत के लिए नई चुनौती

पाकिस्तान की नौसेना आज एक बड़ी सैन्य ताकत हासिल करने जा रही है, क्योंकि चीन उसे हैंगोर क्लास की एडवांस पनडुब्बी सौंपने वाला है। इस मौके पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी चीन के सान्या शहर में मौजूद हैं, जहां वे पांच दिवसीय दौरे पर पहुंचे हैं। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर और रक्षा से जुड़े कई अहम समझौते भी चर्चा में हैं।

दरअसल, पाकिस्तान और चीन के बीच 8 हैंगोर क्लास पनडुब्बियों की बड़ी डील हुई थी। इस समझौते के तहत 4 पनडुब्बियां चीन में तैयार की जा रही हैं, जबकि बाकी 4 का निर्माण कराची शिपयार्ड में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए किया जाएगा। अनुमान है कि 2028 तक चीन में बनी सभी पनडुब्बियां पाकिस्तान को मिल जाएंगी, जबकि स्थानीय स्तर पर बन रही पनडुब्बियां 2032 तक तैयार होंगी।

ये हैंगोर क्लास पनडुब्बियां असल में चीन की युआन क्लास (Type 039A/B) का एक्सपोर्ट वर्जन हैं, जिन्हें खासतौर पर पाकिस्तान की समुद्री ताकत बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है। करीब 5 अरब डॉलर की इस डील के बाद पाकिस्तान की अंडरवाटर फ्लीट में बड़ा इजाफा होगा और कुल संख्या 11 तक पहुंच सकती है।

इन पनडुब्बियों की सबसे बड़ी खासियत AIP यानी एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन तकनीक है। इस तकनीक के चलते पनडुब्बियां लंबे समय तक बिना सतह पर आए पानी के भीतर रह सकती हैं, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है और वे गुप्त मिशन आसानी से अंजाम दे सकती हैं।

हथियारों की बात करें तो ये पनडुब्बियां 533 मिमी टॉरपीडो ट्यूब से लैस हैं और बाबर-3 जैसी सबमरीन लॉन्च क्रूज मिसाइल दागने में सक्षम मानी जा रही हैं। यदि यह पूरी तरह साबित होता है, तो पाकिस्तान को समुद्र से परमाणु जवाबी हमले की क्षमता यानी “सेकंड स्ट्राइक” ताकत मिल सकती है।

स्टील्थ डिजाइन इनकी एक और बड़ी ताकत है, जिससे इन्हें ट्रैक करना बेहद कठिन हो जाता है। हालांकि कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन की AIP तकनीक अभी स्वीडन की स्टर्लिंग प्रणाली जितनी उन्नत नहीं है, जिससे एक बार लोकेशन ट्रैक होने पर इनका छिपना मुश्किल हो सकता है।

रणनीतिक रूप से देखें तो इन पनडुब्बियों के शामिल होने से पाकिस्तान अरब सागर और हिंद महासागर में अपनी गश्त बढ़ा सकता है। इससे भारत के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं, खासकर उसके एयरक्राफ्ट कैरियर जैसे INS विक्रांत के लिए, जिन्हें खुले समुद्र में ऑपरेशन करने में ज्यादा सावधानी बरतनी होगी।

हालांकि भारत भी इस खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। भारतीय नौसेना के पास पनडुब्बी रोधी मजबूत नेटवर्क मौजूद है, जिसमें P-8I पोसाइडन जैसे अत्याधुनिक निगरानी विमान शामिल हैं। इसके अलावा कामोर्ता क्लास के ASW कॉर्वेट, MH-60R सीहॉक हेलीकॉप्टर और कई आधुनिक युद्धपोत तैनात हैं, जो समुद्र में छिपी पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही पाकिस्तान अपनी समुद्री ताकत बढ़ा रहा है, लेकिन अरब सागर का भौगोलिक ढांचा और भारत की निगरानी क्षमता उसे संतुलित बनाए रखेगी। फिर भी भविष्य में यह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।