देश के सबसे बड़े बिजनेस समूह टाटा ग्रुप में इन दिनों अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ रही है। खासतौर पर टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच बोर्ड स्तर पर मतभेद गहराते दिख रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स 8 मई को होने वाली अहम बैठक में टाटा संस के बोर्ड में अपने प्रतिनिधित्व की समीक्षा करने जा रहा है, जिससे बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
इस संभावित बदलाव के दायरे में टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि उनके हालिया बयानों ने विवाद को और हवा दी है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से टाटा संस को लिस्ट करने की बात कही थी, जो ट्रस्ट्स के मौजूदा रुख से अलग है।
दरअसल, पूरा विवाद इसी मुद्दे के इर्द-गिर्द घूम रहा है कि टाटा संस को प्राइवेट ही रखा जाए या फिर उसे शेयर बाजार में उतारा जाए। जहां वेणु श्रीनिवासन और पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह लिस्टिंग के पक्षधर रहे हैं, वहीं चेयरमैन नोएल टाटा और अधिकतर सदस्य कंपनी के मौजूदा प्राइवेट ढांचे को बनाए रखने के पक्ष में हैं।
इसी मतभेद को देखते हुए टाटा ट्रस्ट्स अब यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसके बोर्ड में मौजूद प्रतिनिधि संगठन की आधिकारिक सोच के अनुरूप ही काम करें। यही वजह है कि बोर्ड रिप्रजेंटेशन की समीक्षा को एजेंडे में शामिल किया गया है।
हालांकि, श्रीनिवासन को बोर्ड से बाहर करना आसान फैसला नहीं माना जा रहा। कॉर्पोरेट जगत में उनकी मजबूत पहचान और ट्रस्ट्स के भीतर उनकी भूमिका को देखते हुए यह कदम संवेदनशील हो सकता है।
इस बीच, यह भी ध्यान देने वाली बात है कि विजय सिंह को पिछले साल टाटा संस के बोर्ड में दोबारा जगह नहीं मिली थी, जो इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि को और स्पष्ट करता है।
आने वाली 8 मई की बैठक इसलिए बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे न सिर्फ टाटा संस के बोर्ड की संरचना प्रभावित हो सकती है, बल्कि टाटा ग्रुप की रणनीतिक दिशा भी तय हो सकती है। फिलहाल, संकेत यही हैं कि टाटा ट्रस्ट्स कंपनी को प्राइवेट बनाए रखने के अपने रुख पर कायम है, भले ही कुछ आवाजें इसके विपरीत उठ रही हों।



