मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर सिर्फ ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसका भारत की अर्थव्यवस्था पर बड़ा सकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिल सकता है। वैश्विक निवेश कंपनी Morgan Stanley की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत में पूंजी निवेश का नया दौर शुरू हो सकता है।
रिपोर्ट बताती है कि यदि निवेश-से-जीडीपी अनुपात (Investment-to-GDP Ratio) मौजूदा 36.7% से बढ़कर वित्त वर्ष 2030 तक 37.5% तक पहुंचता है, तो देश में लगभग 800 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश आ सकता है। इस संभावित निवेश का बड़ा हिस्सा ऊर्जा, रक्षा और डेटा सेंटर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में केंद्रित रहने की उम्मीद है।
दरअसल, पश्चिम एशिया में संकट ने भारत की उन कमजोरियों को उजागर किया है, जहां देश अभी भी तेल, गैस और अन्य जरूरी कच्चे माल के आयात पर काफी निर्भर है। इसी वजह से सरकार अब आत्मनिर्भरता बढ़ाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
ऊर्जा सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी है। भारत अपनी लगभग 85% कच्चे तेल और करीब आधी गैस की जरूरत आयात से पूरी करता है। ऐसे में सरकार रणनीतिक भंडारण बढ़ाने, कोयला उत्पादन और गैसीकरण को तेज करने, साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा और परमाणु परियोजनाओं को विस्तार देने की दिशा में काम कर रही है।
उर्वरक क्षेत्र में भी सुधार की कोशिशें तेज हुई हैं। डीएपी और एमओपी जैसे आयातित कच्चे माल पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने, सप्लाई के स्रोतों में विविधता लाने और पोषक तत्वों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई जा रही है, जिससे सब्सिडी का बोझ भी नियंत्रित किया जा सके।
रक्षा क्षेत्र में भी बड़े बदलाव की रूपरेखा तैयार है। सरकार का लक्ष्य है कि 2031 तक रक्षा खर्च को जीडीपी के करीब 2.5% तक पहुंचाया जाए, जिसमें स्वदेशी उत्पादन और निजी कंपनियों की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा।
वहीं, डेटा सेंटर सेक्टर तेजी से उभरता हुआ इंजन बन रहा है। डेटा लोकलाइजेशन नीतियों और वैश्विक कंपनियों की रणनीतिक शिफ्ट के चलते भारत में इस क्षेत्र में भारी निवेश आने की संभावना है। अनुमान है कि देश की डेटा सेंटर क्षमता मौजूदा 1.8 गीगावॉट से बढ़कर 2031 तक 10.5 गीगावॉट तक पहुंच सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते निवेश चक्र से कॉरपोरेट मुनाफे में हिस्सेदारी बढ़ेगी और आने वाले वर्षों में कमाई में 15% से अधिक की सालाना वृद्धि (CAGR) देखने को मिल सकती है, जिसका असर शेयर बाजार पर भी सकारात्मक रहेगा।
(Photo : AI Generated)




