चंडीगढ़ के बहुप्रतीक्षित ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर प्रोजेक्ट को बड़ा झटका लगा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने परियोजना के लिए प्रस्तावित पेड़ों की कटाई और छंटाई पर अंतरिम रोक लगाते हुए चंडीगढ़ प्रशासन को फिलहाल किसी भी तरह की कार्रवाई से दूर रहने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने साफ किया है कि अगली सुनवाई तक ट्रिब्यून चौक और आसपास के क्षेत्र में कोई पेड़ न काटा जाएगा और न ही उसकी शाखाओं की छंटाई की जाएगी। इस आदेश के बाद फ्लाईओवर निर्माण की शुरुआती प्रक्रिया पर तत्काल असर पड़ा है।
मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि याचिका पर विस्तृत बहस पूरी हो चुकी है और अंतिम फैसला जल्द सुनाया जा सकता है। ऐसे में अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने को जरूरी माना। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश अंतरिम है और अंतिम निर्णय के आधार पर आगे की स्थिति तय होगी।
यह मामला उन याचिकाओं से जुड़ा है जिनमें ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर परियोजना को चंडीगढ़ के मास्टर प्लान, हरित ढांचे और शहर की विरासत के खिलाफ बताया गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता तनु बेदी ने अदालत में दलील दी कि मास्टर प्लान-2031 के तहत चंडीगढ़ को पैदल यात्रियों और साइकिल उपयोगकर्ताओं के अनुकूल शहर के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई थी। ऐसे में बड़े फ्लाईओवर और कंक्रीट आधारित ढांचे शहर की मूल पहचान को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि निजी वाहनों को बढ़ावा देने वाली परियोजनाएं ट्रैफिक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हैं। उनका तर्क था कि इससे जाम केवल एक इलाके से दूसरे इलाके में स्थानांतरित होगा, जबकि पर्यावरण और हरित क्षेत्र को स्थायी नुकसान पहुंचेगा। अदालत में यह भी कहा गया कि ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर चंडीगढ़ की शहरी विरासत और सौंदर्य व्यवस्था के लिए दीर्घकालिक खतरा बन सकता है।
वहीं चंडीगढ़ प्रशासन ने परियोजना का मजबूती से बचाव किया। प्रशासन की ओर से वरिष्ठ स्थायी अधिवक्ता अमित झांजी ने अदालत को बताया कि मास्टर प्लान में फ्लाईओवर निर्माण की अनुमति दी गई है और विरासत क्षेत्र केवल सेक्टर-1 से 30 तक सीमित है, पूरा शहर नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि इस परियोजना पर पहले लगी रोक हटाई जा चुकी है और सुप्रीम कोर्ट में दायर चुनौती भी वापस ली जा चुकी है।
प्रशासन ने ट्राईसिटी क्षेत्र में लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव का हवाला देते हुए कहा कि मोहाली, पंचकूला और चंडीगढ़ को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण जंक्शन पर वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में फ्लाईओवर यातायात प्रबंधन के लिए आवश्यक है। प्रशासन ने अदालत को भरोसा दिया कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए काटे जाने वाले पेड़ों के बदले 5:1 अनुपात में 2,799 नए पौधे लगाए जाएंगे और सभी पर्यावरणीय मंजूरियां नियमानुसार प्राप्त की जा चुकी हैं।
हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद अब पूरे मामले पर सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिक गई हैं। अंतिम फैसला न केवल ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर परियोजना का भविष्य तय करेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगा कि तेजी से बढ़ते शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।


