पंजाब में होने जा रहे नगर निगम, नगर कौंसिल और नगर पंचायत चुनावों को लेकर राज्य चुनाव आयोग और प्रशासन ने सुरक्षा एवं चुनावी प्रबंधन की व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रदेशभर में चुनावी माहौल लगातार गर्माता जा रहा है और राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच प्रशासन ने इस बार सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत करने का फैसला लिया है। निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित करने के लिए करीब 75 हजार कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, करीब 35 हजार पुलिस कर्मियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये जवान मतदान केंद्रों, मतगणना स्थलों, संवेदनशील बूथों और नामांकन केंद्रों पर तैनात रहेंगे। इसके अलावा लगभग 35,500 कर्मचारी चुनावी ड्यूटी में लगाए जाएंगे, जो मतदान दलों की आवाजाही, ईवीएम एवं चुनावी सामग्री की सुरक्षा, बूथ प्रबंधन और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालेंगे।
राज्य चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि सभी जिलों में पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लगातार समीक्षा बैठकें की जा रही हैं। जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, दबाव या हिंसक गतिविधि को तुरंत नियंत्रित किया जाए। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील इलाकों की अलग से पहचान कर वहां अतिरिक्त फोर्स तैनात की जाएगी।
कई जिलों में बढ़ी राजनीतिक हलचल
निकाय चुनावों को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले का सबसे बड़ा राजनीतिक परीक्षण माना जा रहा है। यही कारण है कि आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। कई शहरों में टिकट वितरण को लेकर दलों के भीतर नाराजगी भी खुलकर सामने आई है, जिसके चलते बड़ी संख्या में बागी उम्मीदवार निर्दलीय मैदान में उतर आए हैं। इससे कई वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय और बहुकोणीय बन गया है।
राज्य चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेशभर में कुल 10,809 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इनमें नगर निगमों में 2,154, नगर कौंसिलों में 7,334 और नगर पंचायतों में 1,321 उम्मीदवार शामिल हैं। सबसे ज्यादा राजनीतिक मुकाबला नगर कौंसिल क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है, जहां कई वार्डों में कांटे की टक्कर बनने के संकेत हैं।
नामांकन के दौरान विवादों ने बढ़ाई चिंता
हाल के दिनों में कई जिलों से तनाव और विवाद की घटनाएं सामने आने के बाद प्रशासन अतिरिक्त सतर्क हो गया है। फिरोजपुर के मुदकी क्षेत्र में विपक्षी दलों ने उम्मीदवारों को डराने-धमकाने और नामांकन प्रक्रिया में बाधा डालने के आरोप लगाए हैं। वहीं देरा बाबा नानक में एक कांग्रेसी नेता के घर पर फायरिंग की घटना ने राजनीतिक माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया।
इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने जिला प्रशासन को संवेदनशील बूथों की अलग सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही अतिरिक्त पुलिस बल, फ्लैग मार्च, विशेष गश्त और नाकेबंदी बढ़ाने के आदेश भी जारी किए गए हैं। सीमावर्ती और राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाएगी।
हर गतिविधि पर रहेगी नजर
अधिकारियों के अनुसार मतदान प्रक्रिया के दौरान वीडियोग्राफी, सीसीटीवी निगरानी और उड़नदस्ता टीमों की मदद से लगातार नजर रखी जाएगी। सोशल मीडिया मॉनिटरिंग भी तेज कर दी गई है ताकि अफवाहों और भड़काऊ सामग्री पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
चुनाव आयोग ने मतदाताओं से बिना किसी दबाव और डर के मतदान करने की अपील की है। आयोग का कहना है कि किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि नामांकन वापसी की प्रक्रिया 19 मई को पूरी होगी, जिसके बाद चुनावी तस्वीर और अधिक स्पष्ट हो जाएगी। इसके साथ ही सभी राजनीतिक दलों का प्रचार अभियान और तेज होने की संभावना है।




