पंजाब में VIP सिक्योरिटी पर हाई कोर्ट की बड़ी टिप्पणी: ‘स्वीकृति 8 की, तैनाती 23 पुलिसकर्मियों की कैसे?’

पंजाब में VIP सिक्योरिटी पर हाई कोर्ट की बड़ी टिप्पणी: ‘स्वीकृति 8 की, तैनाती 23 पुलिसकर्मियों की कैसे?’

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब में वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा करते हुए राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। राज्यसभा सांसद और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह की सुरक्षा में जरूरत से ज्यादा पुलिस बल तैनात किए जाने के मामले पर अदालत ने तीखी टिप्पणी की है। कोर्ट ने पूछा कि जब रिकॉर्ड में केवल आठ पुलिसकर्मियों की मंजूरी दर्ज है तो फिर 23 पुलिसकर्मी आखिर किसके आदेश पर तैनात किए गए।

जस्टिस जगमोहन बंसल ने सुनवाई के दौरान कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि अधिकृत स्वीकृति से अधिक पुलिसकर्मी लगाए गए हैं तो इसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। कोर्ट ने पंजाब के एडीजीपी सिक्योरिटी और एसएसपी मोगा को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

हाई कोर्ट ने इस मामले को केवल हरभजन सिंह तक सीमित मानने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि अब पूरे पंजाब में वीआईपी सुरक्षा संस्कृति की समीक्षा की जाएगी। कोर्ट ने जिला स्तर पर यह जानकारी मांगी है कि कितने लोगों को सुरक्षा दी गई है, उनमें कितने पुलिसकर्मी आधिकारिक तौर पर तैनात हैं और कितने “अनौपचारिक” रूप से लगाए गए हैं।

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने सुरक्षा व्यवस्था में असमानता का मुद्दा भी उठा। कोर्ट को बताया गया कि एक ओर हरभजन सिंह को 23 पुलिसकर्मियों का सुरक्षा घेरा मिला हुआ है, जबकि दूसरी ओर फायरिंग जैसी गंभीर घटना झेल चुके जिला परिषद के एक उपाध्यक्ष और ठेकेदार को कथित गैंग खतरे के बावजूद केवल एक एएसआई की सुरक्षा दी गई। इस पर अदालत ने चिंता जताई कि क्या सुरक्षा व्यवस्था वास्तविक खतरे के आकलन के आधार पर दी जा रही है या प्रभावशाली लोगों को प्राथमिकता मिल रही है।

हरभजन सिंह ने अपनी याचिका में कहा कि उनकी सुरक्षा बिना किसी नए खतरे के आकलन, नोटिस या सुनवाई के वापस ली गई। उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी छोड़ने की सार्वजनिक घोषणा के बाद अचानक सुरक्षा हटाने का फैसला लिया गया। हरभजन सिंह वर्ष 2022 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर राज्यसभा सदस्य बने थे और फिलहाल जालंधर में अपने परिवार के साथ रह रहे हैं।

हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 मई तय करते हुए साफ कर दिया कि अब इस प्रकरण में किसी भी प्रकार की देरी या स्थगन को स्वीकार नहीं किया जाएगा। अदालत के रुख से यह संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में पंजाब में नेताओं, पूर्व मंत्रियों, खिलाड़ियों और अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों को दी गई सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक जांच हो सकती है। (फोटो जागरण )