पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में न्यायिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट कालेजियम ने दो अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की है। कालेजियम ने जस्टिस एच.एस. ग्रेवाल और जस्टिस दीपेंद्र सिंह नलवा के नाम केंद्र सरकार को भेज दिए हैं। अब इन नियुक्तियों पर अंतिम मुहर केंद्र सरकार की अधिसूचना जारी होने के बाद लगेगी।
दोनों न्यायाधीशों को फरवरी 2025 में अतिरिक्त जज के रूप में नियुक्त किया गया था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने विभिन्न संवैधानिक, दीवानी और आपराधिक मामलों की सुनवाई की है। कालेजियम ने उनके न्यायिक कार्य, फैसलों की गुणवत्ता, मामलों के निपटारे की गति और सेवा रिकॉर्ड का मूल्यांकन करने के बाद उन्हें स्थायी नियुक्ति के लिए उपयुक्त माना है।
न्यायिक रिक्तियों को भरने की दिशा में अहम कदम
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट देश के प्रमुख उच्च न्यायालयों में शामिल है और यहां पंजाब, हरियाणा तथा चंडीगढ़ से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई होती है। हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के कुल 85 स्वीकृत पद हैं, जिनमें 64 स्थायी और 21 अतिरिक्त न्यायाधीशों के पद शामिल हैं।
वर्तमान में हाईकोर्ट में कुल 56 न्यायाधीश कार्यरत हैं। इनमें 20 स्थायी और 16 अतिरिक्त न्यायाधीश शामिल हैं। बड़ी संख्या में रिक्त पद होने के कारण मामलों के निपटारे पर दबाव बना रहता है। ऐसे में नए स्थायी न्यायाधीशों की नियुक्ति से न्यायिक कार्यों में गति आने की उम्मीद जताई जा रही है।
कैसे होती है स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया
उच्च न्यायालयों में अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति आमतौर पर सीमित अवधि के लिए की जाती है। इस दौरान उनके कार्य प्रदर्शन, न्यायिक दक्षता, प्रशासनिक क्षमता और निर्णयों की गुणवत्ता का आकलन किया जाता है। समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट कालेजियम यह तय करता है कि संबंधित न्यायाधीश को स्थायी नियुक्ति दी जाए या नहीं।
स्थायी न्यायाधीश बनने पर उन्हें संवैधानिक पद की पूर्ण मान्यता प्राप्त होती है और वे निर्धारित सेवानिवृत्ति आयु तक अपने पद पर बने रह सकते हैं। इससे न्यायिक व्यवस्था में निरंतरता और स्थिरता सुनिश्चित होती है।
न्यायपालिका में नियुक्तियों की प्रक्रिया तेज
गौरतलब है कि हाल के महीनों में सुप्रीम कोर्ट कालेजियम विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित रिक्तियों को भरने के लिए लगातार सिफारिशें कर रहा है। इसी क्रम में हाल ही में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के लिए 10 अधिवक्ताओं को न्यायाधीश नियुक्त करने की भी अनुशंसा की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि रिक्त पदों को भरने से लंबित मामलों के बोझ को कम करने और न्याय वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
कानूनी हलकों में कालेजियम के इस फैसले को सकारात्मक माना जा रहा है, क्योंकि इससे हाईकोर्ट की न्यायिक क्षमता बढ़ेगी और मामलों के शीघ्र निपटारे की दिशा में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।



