हिमाचल प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के भूमि अधिकारों को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने पेसा (PESA) नियमों में संशोधन का प्रस्ताव तैयार करते हुए एक प्रारूप अधिसूचना जारी की है। इस पहल का उद्देश्य जनजातीय समुदाय की भूमि और संसाधनों की रक्षा करना तथा भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया में स्थानीय ग्राम सभाओं की भागीदारी को अनिवार्य बनाना है।
पंचायती राज विभाग की ओर से जारी मसौदे के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों में जनजातीय समुदाय की जमीन के स्वामित्व और उससे जुड़े अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का मानना है कि स्थानीय समुदायों की सहमति और सहभागिता के बिना भूमि संबंधी फैसले नहीं होने चाहिए, क्योंकि इससे पारंपरिक अधिकारों और सांस्कृतिक पहचान पर प्रभाव पड़ सकता है।
भूमि सौदों पर ग्राम सभा की निगरानी बढ़ेगी
प्रस्तावित संशोधन के तहत हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) नियम, 2011 के एक महत्वपूर्ण प्रावधान में बदलाव किया जा रहा है। यदि अनुसूचित क्षेत्र में किसी अनुसूचित जनजाति से संबंधित व्यक्ति की भूमि का हस्तांतरण किया जाना है, तो उससे पहले संबंधित ग्राम सभा के साथ परामर्श आवश्यक होगा।
सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था भूमि के अनियंत्रित हस्तांतरण को रोकने और जनजातीय परिवारों के हितों की रक्षा करने में मददगार साबित होगी। इससे स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में सीधा अधिकार और भागीदारी मिलेगी।
जनता से मांगे गए सुझाव और आपत्तियां
राज्य सरकार ने इस मसौदे को अंतिम रूप देने से पहले आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और प्रभावित पक्षों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। अधिसूचना के प्रकाशन की तिथि से 30 दिनों के भीतर कोई भी व्यक्ति अपने सुझाव या आपत्तियां लिखित रूप में सरकार को भेज सकता है।
प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद सरकार अंतिम नियम तैयार करेगी। अधिकारियों का कहना है कि जनजातीय समुदायों के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी पक्षों की राय पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित संशोधन पेसा कानून की मूल भावना को मजबूत करेगा। पेसा अधिनियम का उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार देना और स्थानीय संसाधनों पर समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करना है। नए नियम लागू होने के बाद भूमि से जुड़े मामलों में ग्राम सभा की भूमिका पहले की तुलना में अधिक प्रभावशाली हो जाएगी।
अंतिम अधिसूचना के बाद लागू होंगे नए प्रावधान
सरकार ने स्पष्ट किया है कि संशोधन प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद नए नियम प्रदेश के सभी अधिसूचित जनजातीय क्षेत्रों में लागू होंगे। इससे भूमि संरक्षण, स्थानीय स्वशासन और जनजातीय अधिकारों को कानूनी रूप से और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब देशभर में जनजातीय समुदायों के भूमि अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों पर उनके नियंत्रण को लेकर चर्चा तेज है। ऐसे में हिमाचल का यह प्रस्ताव जनजातीय हितों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।


