बच्चों की एकाग्रता पर भारी पड़ रही Reels की आदत, याददाश्त और पढ़ाई पर दिखने लगा असर

बच्चों की एकाग्रता पर भारी पड़ रही Reels की आदत, याददाश्त और पढ़ाई पर दिखने लगा असर

कोविड महामारी के बाद बच्चों और युवाओं की डिजिटल आदतों में बड़ा बदलाव आया है। अब लंबे वीडियो या किताबों की जगह कुछ सेकंड की रील्स और शॉर्ट वीडियो ने ले ली है। मोबाइल पर लगातार स्क्रॉल करने की यह आदत धीरे-धीरे बच्चों के मानसिक विकास और फोकस को प्रभावित कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बदलने वाला कंटेंट दिमाग को तुरंत मनोरंजन तो देता है, लेकिन सोचने और समझने की क्षमता को कमजोर भी कर सकता है।

तेजी से बदलते वीडियो बना रहे दिमाग को अधीर

आज के बच्चे कम उम्र में ही मोबाइल और सोशल मीडिया से जुड़ जाते हैं। उनका दिमाग अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता, खासकर वह हिस्सा जो ध्यान लगाने, भावनाओं को संभालने और नई चीजें सीखने में मदद करता है। ऐसे में जब वे लगातार छोटे-छोटे वीडियो देखते हैं, तो हर नए वीडियो के साथ दिमाग को तुरंत खुशी महसूस होती है। धीरे-धीरे यही आदत एक तरह की निर्भरता बन जाती है।

पढ़ाई और सामान्य गतिविधियां लगने लगीं बोरिंग

विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार शॉर्ट वीडियो देखने वाले बच्चों को किताब पढ़ना, होमवर्क करना या किसी एक काम पर लंबे समय तक ध्यान देना मुश्किल लगने लगता है। उन्हें हर समय नया और तेज मनोरंजन चाहिए होता है। यही वजह है कि कई बच्चों की एकाग्रता कम हो रही है और वे छोटी-छोटी बातें भी जल्दी भूलने लगे हैं।

दिमाग के लिए ‘फास्ट फूड’ जैसा बन चुका है शॉर्ट कंटेंट

जिस तरह जंक फूड शरीर को नुकसान पहुंचाता है, उसी तरह जरूरत से ज्यादा शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट दिमाग पर असर डाल सकता है। शुरुआत में यह मजेदार और आसान लगता है, लेकिन धीरे-धीरे बच्चों की गहरी सोचने और धैर्य रखने की क्षमता कम होने लगती है।

इन संकेतों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

अगर बच्चा बिना मोबाइल के चिड़चिड़ा हो जाए, पढ़ाई में मन न लगाए, हर थोड़ी देर में फोन चेक करे या दोस्तों और आउटडोर गेम्स से दूरी बनाने लगे, तो यह स्क्रीन एडिक्शन का संकेत हो सकता है। माता-पिता को ऐसे बदलावों पर समय रहते ध्यान देने की जरूरत है।

पूरी तरह रोक नहीं, सही बैलेंस है जरूरी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बच्चों से गैजेट्स पूरी तरह छीन लेना समाधान नहीं है। जरूरी यह है कि स्क्रीन टाइम सीमित किया जाए और बच्चों को किताबें पढ़ने, आउटडोर एक्टिविटी, नई हॉबी और पर्याप्त नींद जैसी आदतों की ओर प्रेरित किया जाए। बच्चों को कुछ समय बिना मोबाइल के भी बिताने देना चाहिए, ताकि उनका दिमाग शांत होकर बेहतर तरीके से विकसित हो सके।

(Photo : AI Generated)