भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती मिली है। दोनों देशों ने “रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक सपोर्ट (RELOS)” समझौते को लागू कर दिया है, जिसके तहत अब दोनों देश एक-दूसरे की जमीन पर सीमित संख्या में सैन्य बल और संसाधन तैनात कर सकेंगे। इस समझौते को द्विपक्षीय रणनीतिक रिश्तों में अहम उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।
इस डील के तहत भारत और रूस एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों जैसे एयरबेस, नेवल बेस और अन्य मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग कर पाएंगे। इससे न केवल संयुक्त अभ्यास आसान होंगे, बल्कि लंबी अवधि के ऑपरेशन्स को भी बेहतर तरीके से अंजाम दिया जा सकेगा। दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने में यह कदम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
समझौते की एक खास बात यह है कि इसमें लॉजिस्टिक सपोर्ट का भी विस्तृत प्रावधान रखा गया है। यानी जरूरत पड़ने पर ईंधन, पानी, मरम्मत सुविधाएं, तकनीकी सहायता और अन्य जरूरी संसाधन एक-दूसरे को उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा सैन्य विमानों के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल और फ्लाइट से जुड़ी सेवाएं भी शामिल हैं, जिससे ऑपरेशन्स में सुगमता आएगी।
RELOS समझौते के तहत अधिकतम 3000 सैनिकों की तैनाती की अनुमति दी गई है। साथ ही, दोनों देश एक-दूसरे के क्षेत्र में 5 युद्धपोत और 10 सैन्य विमान भी तैनात कर सकेंगे। हालांकि, यह पूरी व्यवस्था शांति काल तक ही सीमित रहेगी और इसका उपयोग केवल ट्रेनिंग, संयुक्त सैन्य अभ्यास और सहयोगात्मक गतिविधियों के लिए किया जाएगा।
इस समझौते की प्रक्रिया फरवरी 2025 में शुरू हुई थी, जब दोनों देशों ने इसे साइन किया। इसके बाद दिसंबर 2025 में रूस की ओर से इसे आधिकारिक मंजूरी मिली, जिसके बाद अब इसे लागू कर दिया गया है। यह समझौता शुरुआती तौर पर 5 वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा और भविष्य में आपसी सहमति से इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत और रूस के बीच दशकों पुराने रक्षा संबंधों को और गहराई देगी। इससे दोनों देशों की सैन्य क्षमता, समन्वय और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को नई दिशा मिलने की संभावना है।




