अक्षय तृतीया को भारतीय परंपरा में समृद्धि और निवेश की शुरुआत के लिए बेहद शुभ माना जाता है। हर साल की तरह इस बार भी लोग सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, लेकिन 2026 में बाजार की चाल ने निवेशकों को थोड़ा सोचने पर मजबूर कर दिया है। हाल ही में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद बुलियन बाजार में आई तेज गिरावट ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह सही समय है खरीदारी का या अभी इंतजार करना बेहतर रहेगा।
कुछ समय पहले तक सोने और चांदी की कीमतें ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई थीं। सोना जहां प्रति 10 ग्राम लगभग ₹2.30 लाख तक पहुंच गया था, वहीं चांदी भी ₹4.39 लाख प्रति किलो के आसपास ट्रेड कर रही थी। लेकिन इसके बाद बाजार में अचानक नरमी आई और कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। मौजूदा समय में सोना करीब ₹1.55 लाख और चांदी ₹2.49 लाख के स्तर पर आ गई है, जो अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उतार-चढ़ाव वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का नतीजा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव, खासकर मध्य-पूर्व में घटनाक्रम, और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने बाजार पर गहरा असर डाला है। एक समय ब्रेंट क्रूड $120 प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका तेज हो गई थी। हालांकि अब कीमतें कुछ कम होकर $90 के आसपास आ गई हैं, लेकिन अस्थिरता अभी भी बनी हुई है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे वैश्विक महंगाई फिर से बढ़ सकती है। ऐसे हालात में केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो जाता है। वहीं, अगर आर्थिक विकास को प्राथमिकता दी जाती है, तो वास्तविक ब्याज दरें कम हो सकती हैं, जो सोने के लिए सकारात्मक संकेत माने जाते हैं।
निवेश विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि दुनिया भर में बढ़ता सरकारी कर्ज और वित्तीय घाटा लंबे समय में सोने की मांग को मजबूती दे सकता है। साथ ही, वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर की पकड़ धीरे-धीरे कमजोर होने की संभावना भी गोल्ड के पक्ष में माहौल बना सकती है। ऐसे में आने वाले महीनों में सोने की कीमतों में फिर से तेजी लौट सकती है।
भारत में सोना केवल निवेश का साधन नहीं, बल्कि परंपरा और सुरक्षा का प्रतीक भी है। आंकड़ों के अनुसार, भारतीय परिवारों के पास दुनिया के कुल सोने का एक बड़ा हिस्सा मौजूद है, जो कई विकसित देशों के भंडार से भी ज्यादा है। यही कारण है कि अक्षय तृतीया जैसे अवसर पर सोना खरीदना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आस्था का हिस्सा भी माना जाता है।
तो क्या करें निवेशक?
अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो मौजूदा गिरावट को एक अवसर के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, शॉर्ट-टर्म में बाजार में और उतार-चढ़ाव संभव है, इसलिए एकमुश्त निवेश करने के बजाय धीरे-धीरे खरीदारी करना ज्यादा सुरक्षित रणनीति हो सकती है। कुल मिलाकर, अक्षय तृतीया पर खरीदारी करना शुभ तो है, लेकिन समझदारी के साथ कदम उठाना और बाजार के संकेतों को ध्यान में रखना जरूरी है।




