हरियाणा सरकार ने संकटग्रस्त, बेसहारा और सामाजिक रूप से कमजोर परिस्थितियों में जीवन यापन कर रही महिलाओं को सुरक्षित आश्रय और पुनर्वास उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य के 21 जिलों में जल्द ही ‘शक्ति सदन’ स्थापित किए जाएंगे, जहां महिलाओं को रहने, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और आत्मनिर्भर बनने के अवसर एक ही स्थान पर उपलब्ध कराए जाएंगे।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मिशन शक्ति योजना के तहत शुरू की जा रही इस पहल का उद्देश्य उन महिलाओं को सहायता प्रदान करना है जो घरेलू हिंसा, मानव तस्करी, सामाजिक उत्पीड़न, परित्याग, आर्थिक असुरक्षा या अन्य गंभीर परिस्थितियों का सामना कर रही हैं। सरकार का मानना है कि ऐसी महिलाओं को केवल अस्थायी आश्रय ही नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन की ओर वापस लौटने का अवसर भी मिलना चाहिए।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार करनाल और रोहतक को छोड़कर राज्य के बाकी 21 जिलों में शक्ति सदन स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए उपयुक्त भवनों और स्थानों की पहचान की जा रही है। प्रारंभिक चरण में इन केंद्रों का संचालन किराये के भवनों में किया जाएगा, जहां एक समय में लगभग 50 महिलाओं के रहने की व्यवस्था होगी।
सरकार ने शक्ति सदनों के लिए न्यूनतम बुनियादी मानक भी तय किए हैं। प्रत्येक केंद्र में पर्याप्त आवासीय सुविधा, सुरक्षा प्रबंध, स्वच्छ वातावरण, भोजन, चिकित्सा सहायता, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा महिलाओं को कौशल विकास और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण से जोड़ने की भी योजना है ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रुति चौधरी ने कहा कि इन केंद्रों के संचालन में अनुभवी गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। केवल वही संस्थाएं इस जिम्मेदारी के लिए पात्र होंगी जो विधिवत पंजीकृत हों और महिला कल्याण, पुनर्वास तथा सामाजिक सेवा के क्षेत्र में कार्य का अनुभव रखती हों।
उन्होंने बताया कि चयनित संस्थाओं को महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना होगा। इसके साथ ही उन्हें स्वास्थ्य देखभाल, पोषण, कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श और पुनर्वास कार्यक्रमों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करना होगा। संस्थाओं को सभी रिकॉर्ड, केस फाइलें, कर्मचारियों का विवरण और वित्तीय दस्तावेज व्यवस्थित रूप से बनाए रखने होंगे।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी विभाग या एजेंसी द्वारा ब्लैकलिस्ट की गई संस्थाओं को शक्ति सदन संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहीं उन संगठनों को प्राथमिकता मिलेगी जिनका कार्य रिकॉर्ड बेहतर रहा है और जो पहले से महिला सशक्तिकरण एवं पुनर्वास कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
शक्ति सदनों की कार्यप्रणाली पर नियमित निगरानी रखने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की विशेष टीमें समय-समय पर निरीक्षण करेंगी। केंद्रों में महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों से संबंधित सभी कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा तकनीकी निगरानी के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम का भी उपयोग किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानव तस्करी, घरेलू हिंसा और सामाजिक उत्पीड़न की शिकार महिलाओं के लिए इस प्रकार के केंद्र बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। ऐसे संस्थान न केवल तत्काल राहत प्रदान करते हैं, बल्कि महिलाओं को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
गौरतलब है कि देशभर में पहले से संचालित शक्ति सदनों के माध्यम से हजारों महिलाओं को पुनर्वास और संरक्षण का लाभ मिल चुका है। हरियाणा सरकार को उम्मीद है कि राज्य में शुरू होने वाले नए शक्ति सदन महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत सामाजिक सुरक्षा तंत्र के रूप में उभरेंगे तथा जरूरतमंद महिलाओं को नया जीवन शुरू करने का अवसर प्रदान करेंगे।


