पंजाब सरकार ने आगामी मानसून को ध्यान में रखते हुए बाढ़ की आशंका कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह तय किया गया कि दरियाओं, चोओं और सेम नालों की सफाई प्रक्रिया को तेज करने के लिए जमीन मालिकों को अपनी लागत पर गाद निकालने की अनुमति दी जाएगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सफाई के दौरान निकली मिट्टी या अन्य सामग्री का उपयोग जमीन मालिक बिना किसी शुल्क के कर सकेंगे। इस कदम का उद्देश्य सफाई कार्य को गति देना और जल स्रोतों में पानी के प्रवाह को बेहतर बनाना है, ताकि बारिश के मौसम में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियों से बचा जा सके।
यह फैसला खास तौर पर सतलुज नदी, ब्यास नदी और सिसवां नदी सहित कई अन्य जल स्रोतों पर लागू होगा। लंबे समय से इन नदियों और नालों में जमा गाद के कारण पानी का बहाव प्रभावित हो रहा था, जिससे हर साल मानसून के दौरान खतरा बढ़ जाता है।
इसके अलावा, सरकार ने ऐसे 9 संवेदनशील स्थानों की पहचान की है जहां तुरंत सफाई जरूरी मानी गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि समय पर गाद नहीं हटाई गई, तो पानी का प्रवाह बाधित हो सकता है और बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है।
राज्य सरकार ने संबंधित जमीन मालिकों से इस पहल में सक्रिय सहयोग की अपील की है, ताकि मानसून से पहले ही जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सके और लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।




