बरसात के मौसम से पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सरकार ने शहरी क्षेत्रों में जलभराव और सीवर व्यवस्था को लेकर बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री ने सभी नगर निकायों, प्रशासनिक अधिकारियों और जिला उपायुक्तों को साफ निर्देश दिए हैं कि मानसून आने से पहले शहरों में नाले, नालियां और जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त कर ली जाए, ताकि लोगों को हर साल होने वाली परेशानी से राहत मिल सके।
सरकार ने 20 जून तक सभी प्रमुख सफाई कार्य पूरे करने की समयसीमा तय की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि किसी शहर में बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति पैदा होती है और सफाई व्यवस्था में लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सीधे कार्रवाई की जाएगी।
हर साल डूबते शहरों पर सरकार की नजर
गुरुग्राम, फरीदाबाद, अंबाला और हिसार जैसे शहरों में थोड़ी सी बारिश के बाद भी सड़कों पर जलभराव की समस्या आम हो चुकी है। कई इलाकों में पानी भरने से ट्रैफिक जाम, सीवर ओवरफ्लो और लोगों के घरों तक पानी पहुंचने जैसी स्थितियां हर साल देखने को मिलती हैं। इसी को देखते हुए इस बार सरकार पहले से अधिक सतर्क नजर आ रही है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने सभी जिलों से सफाई अभियान की प्रगति रिपोर्ट भी मांगी है। नगर निकाय आयुक्तों को सफाई कार्यों की सीधी जिम्मेदारी दी गई है, जबकि जिला उपायुक्तों को निगरानी कर सरकार को रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
रेनवॉटर हार्वेस्टिंग पर भी फोकस
सरकार ने केवल नालों की सफाई तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि वर्षा जल संरक्षण को लेकर भी विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। अधिकारियों को रेनवॉटर हार्वेस्टिंग पिट की सफाई कराने और खराब डिजाइन वाले पिटों को दोबारा व्यवस्थित करने को कहा गया है। जिन स्थानों पर पिट ऊंचाई वाले हिस्सों में बनाए गए हैं, उन्हें ढलान वाली जगहों पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बारिश का पानी सही तरीके से संग्रहित हो सके।
अवैध सीवर और पानी कनेक्शन पर भी सख्ती
सरकार ने पेयजल और सीवर लाइनों में अवैध कनेक्शन लेने वालों के खिलाफ भी अभियान चलाने के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने सभी जिलों से पूछा है कि अब तक कितने अवैध कनेक्शन काटे गए और कितनों पर कार्रवाई की गई। माना जा रहा है कि अवैध कनेक्शनों की वजह से सीवर सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है, जिससे बारिश के दौरान जल निकासी व्यवस्था और खराब हो जाती है।
करोड़ों खर्च, फिर भी हर साल परेशानी
हर वर्ष नालों और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद कई शहरों में पहली ही बारिश प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोल देती है। यही वजह है कि इस बार सरकार जवाबदेही तय करने के मूड में नजर आ रही है। अधिकारियों को साफ संदेश दिया गया है कि कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम दिखाई देने चाहिए।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में विभिन्न शहरों में विशेष निरीक्षण अभियान भी चलाए जा सकते हैं, ताकि मानसून शुरू होने से पहले सभी व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।




