मिडिल ईस्ट तनाव से तेल बाजार में उछाल: कच्चा तेल 4 साल के उच्चतम स्तर पर

मिडिल ईस्ट तनाव से तेल बाजार में उछाल: कच्चा तेल 4 साल के उच्चतम स्तर पर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ते हुए करीब 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जो मार्च 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड लगभग 125 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है।

तेल की इस तेजी के पीछे प्रमुख वजह क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितता और सप्लाई को लेकर चिंता है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव ने बाजार को अस्थिर कर दिया है, क्योंकि यह दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में गिना जाता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका की ओर से ईरान पर सख्त रुख ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर अपनी सैन्य नाकेबंदी जारी रखने का संकेत दिया है, जब तक कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई समझौता नहीं होता। इस बयान के बाद तेल सप्लाई बाधित होने की आशंका और बढ़ गई।

इसी बीच ईरान के वरिष्ठ नेताओं ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में तेल की कीमतें आगे और बढ़कर 140 डॉलर तक जा सकती हैं। उन्होंने अमेरिकी नीतियों को इस बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

दूसरी ओर, अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान पर भारी खर्च भी सामने आया है। बीते दो महीनों में अमेरिका लगभग 25 अरब डॉलर खर्च कर चुका है, जिसमें ज्यादातर राशि हथियारों और सैन्य संसाधनों पर लगी है।

पिछले 24 घंटों के प्रमुख घटनाक्रम:

  • अमेरिका ने पहली बार ईरान के खिलाफ युद्ध में 25 अरब डॉलर खर्च होने की पुष्टि की
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ने सख्त संदेश देते हुए हथियार के साथ अपनी तस्वीर साझा की
  • ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका पर तेल जब्ती का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई
  • लेबनान में युद्ध और आर्थिक संकट के चलते लाखों लोगों पर खाद्य संकट का खतरा
  • भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच क्षेत्रीय स्थिति और युद्धविराम पर चर्चा हुई

कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार दोनों को अस्थिर कर दिया है, और आने वाले समय में कीमतों में और उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है।