केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू की एक कथित जातिसूचक टिप्पणी को लेकर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए संगरूर पुलिस प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने मामले को संवेदनशील मानते हुए इसकी जांच करवाने और तथ्यात्मक रिपोर्ट निर्धारित समय के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
मामला उस वीडियो से जुड़ा बताया जा रहा है, जो हाल ही में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में धूरी क्षेत्र के एक घटनाक्रम के दौरान कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। वीडियो सामने आने के बाद विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक हलकों में इस पर चर्चा शुरू हो गई, जिसके बाद आयोग ने हस्तक्षेप किया।
आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान
पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी ने बताया कि मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के आधार पर आयोग के संज्ञान में यह मामला आया। प्रारंभिक जानकारी को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने संगरूर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट मांगी है।
आयोग का कहना है कि अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। इसलिए तथ्यों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
धूरी में चुनावी ड्यूटी के दौरान हुआ था विवाद
जानकारी के अनुसार, यह घटनाक्रम नगर निकाय चुनावों के दौरान धूरी में सामने आया था। उस समय चुनावी ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ रवनीत सिंह बिट्टू की किसी मुद्दे को लेकर तीखी बहस हो गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बहस के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया था और दोनों पक्षों के बीच तीखे शब्दों का आदान-प्रदान हुआ।
इसी दौरान कथित रूप से कुछ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया गया, जिन्हें लेकर बाद में विवाद खड़ा हो गया। घटना से संबंधित वीडियो क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल होने लगी, जिसके बाद मामला व्यापक चर्चा का विषय बन गया।
पुलिस प्रशासन से मांगा गया तथ्यात्मक जवाब
आयोग ने संगरूर पुलिस को निर्देश दिए हैं कि वायरल वीडियो, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, आयोग ने पुलिस अधिकारियों को वायरल वीडियो के सभी पहलुओं की जांच करने, घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज करने तथा पूरे मामले का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करने को कहा है।
1 जून तक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश
पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने इस मामले में तेजी दिखाते हुए रिपोर्ट जमा करने के लिए समय सीमा भी निर्धारित की है। आयोग ने निर्देश दिया है कि संपूर्ण जांच रिपोर्ट 1 जून 2026 को सुबह 9 बजे तक उसके समक्ष प्रस्तुत की जाए। रिपोर्ट एसपी (मुख्यालय) संगरूर के माध्यम से भेजी जाएगी।
आयोग का मानना है कि समयबद्ध जांच से मामले के तथ्यों को जल्द सामने लाने में मदद मिलेगी और यदि किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता होगी तो उस दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज
मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कई संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है।
फिलहाल सभी की निगाहें पुलिस जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल वीडियो में लगाए जा रहे आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई की जा सकती है।
जांच के बाद तय होगी अगली कार्रवाई
पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने संकेत दिया है कि रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद मामले की समीक्षा की जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार के नियमों या कानून का उल्लंघन सामने आता है, तो आयोग अपने अधिकार क्षेत्र के अनुसार अगली कार्रवाई पर विचार करेगा।
इस बीच, मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इसकी जांच से जुड़े नए तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।




