हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फैसला लेते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजय गुप्ता को राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त कर दिया है। खास बात यह है कि उनकी सेवानिवृत्ति में अब केवल कुछ दिन ही शेष हैं। कार्मिक विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार 1988 बैच के अधिकारी संजय गुप्ता को औपचारिक रूप से मुख्य सचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
संजय गुप्ता पिछले कई महीनों से इस पद का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे थे। पूर्व मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना को सेवा विस्तार मिलने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था के तहत उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई थी। अब सरकार ने उन्हें पूर्णकालिक मुख्य सचिव नियुक्त कर प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी है।
सेवानिवृत्ति से कुछ दिन पहले मिली जिम्मेदारी
संजय गुप्ता 31 मई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, लेकिन अवकाश के चलते उनका कार्यकाल 30 मई तक ही माना जाएगा। ऐसे में उन्हें रिटायरमेंट से ठीक पहले मुख्य सचिव बनाए जाने को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि प्रदेश में शीर्ष प्रशासनिक स्तर पर संतुलन बनाए रखने और चल रहे विभागीय कार्यों में निरंतरता बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया।
बताया जा रहा है कि हिमाचल के प्रशासनिक इतिहास में यह पहली बार है जब किसी अधिकारी ने करीब आठ महीने तक मुख्य सचिव का अतिरिक्त कार्यभार संभालने के बाद रिटायरमेंट से महज कुछ दिन पहले नियमित रूप से इस पद की जिम्मेदारी संभाली हो।
कई विभागों में फेरबदल
सरकार ने इस नियुक्ति के साथ प्रशासनिक फेरबदल भी किया है। सचिव सहकारिता अमरजीत सिंह को नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वहीं कुछ अन्य अधिकारियों के दायित्वों में भी बदलाव किए गए हैं ताकि विभागीय कार्य प्रभावित न हों।
राज्य सरकार ने एचएएस अधिकारियों के स्तर पर भी बदलाव किए हैं। अतिरिक्त सचिव राजस्व एवं आपदा प्रबंधन निशांत ठाकुर को राजस्व विभाग का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। वहीं विनय मोदी को एसी टू डीसी ऊना के पद पर तैनात किया गया है। उनके पास अनुसूचित जाति आयोग ऊना के सदस्य सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा।
अब अगला मुख्य सचिव कौन?
संजय गुप्ता के कार्यकाल के बेहद छोटा होने के कारण अब अगले स्थायी मुख्य सचिव को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। वरिष्ठता और प्रशासनिक अनुभव के आधार पर 1993 बैच के आईएएस अधिकारी केके पंत को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वर्तमान में उनके पास गृह, राजस्व और वन जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी है।
इसके अलावा 1994 बैच के अधिकारी ओंकार चंद शर्मा और 1995 बैच के वरिष्ठ अधिकारी आरडी नजीम का नाम भी चर्चा में है। दोनों अधिकारी लंबे समय से प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं और सरकार के अहम फैसलों में उनकी भूमिका मानी जाती है।
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत वरिष्ठ अधिकारियों अनुराधा ठाकुर और भरत हरबंस खेड़ा के नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि अंतिम फैसला सरकार की रणनीति और राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेगा।
विवादों में भी रहा नाम
मुख्य सचिव का अतिरिक्त कार्यभार संभालने के दौरान संजय गुप्ता का नाम कई विवादों में भी सामने आया था। सोलन जिले के चर्चित चेस्टर हिल प्रकरण को लेकर विपक्षी दलों ने उन पर सवाल उठाए थे। भाजपा और माकपा ने उन्हें पद से हटाने की मांग भी की थी।
एक प्रशासनिक आदेश को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि सरकार को वह आदेश वापस लेना पड़ा। मामले की जांच भी चल रही है। हालांकि संजय गुप्ता ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज किया था।
प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने की कोशिश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार फिलहाल प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखना चाहती है। आगामी समय में कई बड़े विकास और निवेश संबंधी फैसले प्रस्तावित हैं, ऐसे में अनुभवी अधिकारियों को शीर्ष पदों पर बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता मानी जा रही है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि संजय गुप्ता के सेवानिवृत्त होने के बाद सरकार किस अधिकारी को हिमाचल प्रदेश की नौकरशाही का नया मुखिया बनाती है।



