‘किंग ऑफ पॉप’ Michael Jackson की जिंदगी पर आधारित फिल्म ‘माइकल’ अभी रिलीज भी नहीं हुई है, लेकिन उससे पहले ही यह बड़े विवाद का हिस्सा बन गई है। दुनियाभर के फिल्म समीक्षक इस बायोपिक को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि फिल्म में माइकल जैक्सन की जिंदगी के कई अहम और संवेदनशील पहलुओं को पूरी तरह से नहीं दिखाया गया।
प्रीमियर के बाद मिले निराशाजनक रिव्यू
फिल्म का प्रीमियर बर्लिन, लॉस एंजेलिस समेत कई बड़े शहरों में हो चुका है। लेकिन शुरुआती रिव्यूज़ मेकर्स के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं। मशहूर रिव्यू प्लेटफॉर्म Rotten Tomatoes पर फिल्म को महज 32% स्कोर मिला है, जो इसकी कमजोर प्रतिक्रिया को दर्शाता है। कई समीक्षकों का मानना है कि फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती और यह एक अधूरी कहानी पेश करती है।
कहानी और स्क्रीनप्ले पर उठे सवाल
एंटरटेनमेंट वेबसाइट IndieWire ने फिल्म को ‘C-ग्रेड’ देते हुए लिखा कि इसमें समय और घटनाओं के बीच संतुलन की कमी है। फिल्म में माइकल जैक्सन के शुरुआती जीवन और उनके लंबे करियर को एक साथ दिखाने की कोशिश की गई है, लेकिन यह प्रयास प्रभावी नहीं बन पाया। रिव्यू के अनुसार, फिल्म कई जगहों पर बिखरी हुई लगती है और दर्शकों को बांधकर नहीं रख पाती।
विजुअल्स और प्रेजेंटेशन पर भी आलोचना
BBC ने फिल्म को 5 में से केवल 1 स्टार दिया और कहा कि इसके विजुअल्स और डायलॉग्स बेहद कमजोर हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि माइकल जैक्सन के आइकॉनिक कॉन्सर्ट सीन, जो फिल्म की जान हो सकते थे, वे भी दर्शकों को प्रभावित करने में असफल रहे। यानी, जिस एनर्जी और ग्रैंडनेस की उम्मीद की जा रही थी, वह स्क्रीन पर नजर नहीं आती।
‘द गार्डियन’ ने बताया निराशाजनक प्रयास
ब्रिटिश अखबार The Guardian ने फिल्म को 5 में से 2 स्टार दिए और इसे ‘बेजान’ बताया। उनके मुताबिक, फिल्म में गहराई की कमी है और मेकर्स ने कठिन सच्चाइयों को दिखाने से बचने की कोशिश की है। रिव्यू में यह भी कहा गया कि फिल्म माइकल जैक्सन को केवल एक पीड़ित और महान कलाकार के रूप में दिखाती है, लेकिन उनके जीवन के विवादों को नजरअंदाज कर देती है।
विवाद की असली वजह क्या है?
इस बायोपिक को लेकर सबसे बड़ा विवाद माइकल जैक्सन के बचपन और कथित शोषण से जुड़े पहलुओं को लेकर है। आलोचकों का कहना है कि फिल्म में इन मुद्दों को पूरी तरह से हटा दिया गया है, जिससे कहानी अधूरी और एकतरफा लगती है। दर्शकों और समीक्षकों का मानना है कि एक बायोपिक का उद्देश्य सिर्फ उपलब्धियों को दिखाना नहीं होता, बल्कि पूरी सच्चाई सामने लाना भी जरूरी होता है।
कानूनी अड़चनों ने बदली फिल्म की दिशा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1993 में लगे गंभीर आरोपों और 1994 में हुए कानूनी समझौते की वजह से मेकर्स कुछ घटनाओं को फिल्म में शामिल नहीं कर पाए। कहा जाता है कि इसी कारण फिल्म के कुछ हिस्सों को दोबारा शूट किया गया और कहानी में बदलाव करना पड़ा। यह भी चर्चा है कि मेकर्स को कानूनी सीमाओं के चलते कई संवेदनशील सीन हटाने पड़े, जिससे फिल्म का नैरेटिव प्रभावित हुआ।
परिवार की प्रतिक्रिया ने बढ़ाई चर्चा
माइकल जैक्सन की बेटी Paris Jackson ने भी इस फिल्म को लेकर अप्रत्यक्ष रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने इसे ‘शुगर-कोटेड’ यानी हकीकत से दूर बताया और स्पष्ट किया कि वह इस प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं हैं। उनकी प्रतिक्रिया के बाद फिल्म को लेकर बहस और तेज हो गई है।
रिलीज डेट और दर्शकों की उत्सुकता
विवादों के बावजूद ‘माइकल’ की रिलीज तय समय पर ही होने जा रही है। यह फिल्म दुनियाभर में 24 अप्रैल को बड़े पर्दे पर रिलीज होगी, जबकि भारत में इसे एक दिन पहले यानी 23 अप्रैल 2026 को रिलीज किया जाएगा। फिल्म की एडवांस बुकिंग शुरू हो चुकी है, जिससे साफ है कि विवादों के बीच भी दर्शकों में इसे लेकर उत्सुकता बनी हुई है।
क्या दर्शकों को पसंद आएगी फिल्म?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आलोचनाओं के बावजूद क्या ‘माइकल’ दर्शकों का दिल जीत पाएगी या नहीं। कई बार विवाद फिल्मों को और ज्यादा चर्चा में ले आते हैं, जिससे बॉक्स ऑफिस पर फायदा भी हो सकता है।
हालांकि, यह तो फिल्म रिलीज के बाद ही साफ होगा कि दर्शक इसे किस नजरिए से देखते हैं, एक शानदार बायोपिक के रूप में या फिर अधूरी कहानी के तौर पर।




