हरियाणा की मंडियों पर घमासान: दुष्यंत चौटाला ने सरकार को घेरा, बोले- किसान भुगतान और खरीद व्यवस्था से परेशान

हरियाणा की मंडियों पर घमासान: दुष्यंत चौटाला ने सरकार को घेरा, बोले- किसान भुगतान और खरीद व्यवस्था से परेशान

दुष्यंत चौटाला ने हरियाणा में चल रहे गेहूं खरीद सीजन को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। पूर्व उपमुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य की फसल खरीद व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित हो चुकी है और इसका सबसे बड़ा नुकसान किसानों तथा आढ़तियों को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार न तो समय पर फसल खरीद सुनिश्चित कर पा रही है और न ही किसानों को समय पर भुगतान मिल रहा है।

दुष्यंत चौटाला ने कहा कि खरीद सीजन के दौरान सरकार ने गेट पास और बायोमेट्रिक जैसे नए नियम लागू करके किसानों की परेशानियां और बढ़ा दीं। उनका आरोप है कि इन व्यवस्थाओं को पारदर्शिता के नाम पर लागू किया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर इससे अव्यवस्था और देरी ही बढ़ी है।

पूर्व डिप्टी सीएम ने दावा किया कि भाजपा सरकार की नाकामी के चलते दूसरे राज्यों, खासकर उत्तर प्रदेश से बड़ी मात्रा में गेहूं हरियाणा में लाकर बेचा गया। उन्होंने कहा कि सरकार बार-बार पारदर्शी खरीद प्रणाली का दावा करती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि मंडियों में बड़े स्तर पर गड़बड़ियां हो रही हैं।

उन्होंने करनाल जिले में कई आढ़तियों के खिलाफ दर्ज मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार असली मास्टरमाइंड तक पहुंचने के बजाय आढ़तियों पर कार्रवाई कर रही है। चौटाला के अनुसार सरकार अब खरीद व्यवस्था की खामियां छिपाने के लिए एजेंसियों और व्यापारियों को निशाना बना रही है।

भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि इससे पहले भी राज्य में बड़े धान घोटाले सामने आए थे, लेकिन किसी उच्च स्तरीय जांच के जरिए दोषियों तक पहुंचने की गंभीर कोशिश नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि फसल खरीद में भ्रष्टाचार रोकने के बजाय सरकार केवल दिखावटी कदम उठा रही है।

दुष्यंत चौटाला ने अपनी पूर्व गठबंधन सरकार के कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि कोरोना महामारी जैसे कठिन दौर में भी किसानों के लिए खरीद और भुगतान की बेहतर व्यवस्था की गई थी। उन्होंने दावा किया कि उस समय किसानों को दो दिनों के भीतर सीधे बैंक खातों में भुगतान मिल जाता था, जबकि मौजूदा समय में किसान 20 से 25 दिनों तक भुगतान का इंतजार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि गेहूं खरीद प्रक्रिया पूरी हुए लगभग दो सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक मंडियों से पूरी फसल का उठान नहीं हो पाया है। कई मंडियों में गेहूं के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। मौसम खराब होने की स्थिति में किसानों को नुकसान का डर भी सता रहा है।

चौटाला ने सरकार से मांग की कि खरीद सीजन के दौरान बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए और किसानों व आढ़तियों को परेशान करने वाली प्रक्रियाओं में सुधार किया जाए। उन्होंने कहा कि कृषि आधारित राज्य में यदि मंडी व्यवस्था सुचारु नहीं होगी तो इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हरियाणा में फसल खरीद और किसानों के भुगतान का मुद्दा आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है, क्योंकि विपक्ष लगातार सरकार की कृषि नीतियों और मंडी प्रबंधन पर सवाल उठा रहा है।