पूर्व उपमुख्यमंत्री और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बठिंडा के चर्चित मौड़ मंडी बम धमाके मामले को लेकर भगवंत सिंह मान सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पंजाब के सबसे दर्दनाक बम धमाकों में शामिल मुख्य आरोपी आज भी कानून की पकड़ से बाहर हैं और सरकार इस संवेदनशील मामले की जांच को गंभीरता से आगे बढ़ाने में विफल रही है।
रंधावा ने कहा कि 31 जनवरी 2017 को हुए मौड़ मंडी विस्फोट ने पूरे पंजाब को झकझोर कर रख दिया था। इस हादसे में पांच मासूम बच्चों समेत सात लोगों की मौत हो गई थी, जबकि दो दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। उन्होंने कहा कि इतने वर्षों बाद भी पीड़ित परिवार न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन सरकार केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित दिखाई दे रही है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने दावा किया कि मामले के मुख्य आरोपी गुरतेज सिंह, अवतार सिंह और अमरीक सिंह अब तक फरार हैं और पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने में असफल रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां आज तक यह पता नहीं लगा सकीं कि धमाके में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक पदार्थ कहां से आया था।
रंधावा ने कहा कि पंजाब के पिछले कई दशकों के इतिहास में यह सबसे भयावह घटनाओं में से एक थी, लेकिन इसकी जांच जिस गंभीरता से होनी चाहिए थी, वैसी नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी एजेंसियां मामले की तह तक पहुंचने में नाकाम साबित हुई हैं और इससे जांच तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं।
उन्होंने कुलतार सिंह संधवां और मुख्यमंत्री भगवंत मान को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि विपक्ष में रहते हुए दोनों नेता इस मामले में दोषियों को सजा दिलाने के बड़े दावे करते थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद कार्रवाई की रफ्तार धीमी पड़ गई। रंधावा के अनुसार आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद यह मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला गया।
रंधावा ने यह भी कहा कि वर्ष 2020 में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख के समधी हरमंदिर सिंह जस्सी को जांच में शामिल किया था, लेकिन उसके बाद कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि डेरा प्रमुख से भी पूछताछ नहीं की गई, जिससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि इस मामले को लेकर पंजाब सरकार को हाईकोर्ट की फटकार का भी सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद अब तक कोई निर्णायक परिणाम सामने नहीं आया। रंधावा ने कहा कि आतंक और हिंसा से जुड़े मामलों में देरी से मिलने वाला न्याय लोगों के भरोसे को कमजोर करता है और इससे कानून व्यवस्था पर भी असर पड़ता है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों के दर्द का जिक्र करते हुए कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों और प्रियजनों को खोया, वे आज भी इंसाफ की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि जांच प्रक्रिया को तेज किया जाए, फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए और मामले को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौड़ मंडी बम विस्फोट का मुद्दा आने वाले समय में पंजाब की राजनीति में फिर प्रमुखता से उठ सकता है, क्योंकि विपक्ष लगातार सरकार की कानून व्यवस्था और जांच एजेंसियों की कार्यशैली को लेकर सवाल उठा रहा है।




