हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर उथल-पुथल तेज हो गई है। भाजपा सांसद Rekha Sharma की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री Bhajan Lal पर की गई टिप्पणी ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इस बयान से आहत उनके बेटे और वरिष्ठ नेता Kuldeep Bishnoi अब भाजपा के साथ अपने भविष्य को लेकर गंभीर मंथन कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, कुलदीप बिश्नोई ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि पार्टी नेतृत्व रेखा शर्मा से सार्वजनिक माफी नहीं मंगवाता, तो वे वैकल्पिक राजनीतिक रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे। यह स्थिति भाजपा के लिए असहज मानी जा रही है, क्योंकि बिश्नोई परिवार हरियाणा की राजनीति में प्रभावशाली रहा है।
तीन विकल्पों पर चल रहा मंथन
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कुलदीप बिश्नोई फिलहाल तीन प्रमुख विकल्पों पर विचार कर रहे हैं:
1. कांग्रेस में वापसी
कभी Rahul Gandhi के करीबी रहे बिश्नोई के लिए कांग्रेस में वापसी का रास्ता खुला माना जा रहा है। हालांकि पार्टी के भीतर उनकी स्थिति क्या होगी, यह स्पष्ट नहीं है, क्योंकि पहले भी कई नेताओं की वापसी के बाद उनकी भूमिका सीमित हो गई थी।
2. हरियाणा जनहित कांग्रेस का पुनर्गठन
दूसरा विकल्प है अपने पिता द्वारा बनाई गई पार्टी Haryana Janhit Congress को फिर से सक्रिय करना। यह पार्टी पहले कांग्रेस और बाद में भाजपा में विलय कर दी गई थी, लेकिन बिश्नोई परिवार के पास इसे फिर से खड़ा करने का अनुभव और आधार मौजूद है।
3. क्षेत्रीय गठबंधन की राजनीति
तीसरा विकल्प इनेलो और जजपा जैसे दलों के साथ मिलकर गैर-जाट राजनीति को मजबूत करना है। हालांकि Abhay Singh Chautala जैसे नेताओं की भूमिका इसमें अहम होगी और यह रास्ता उतना आसान नहीं माना जा रहा।
विरासत और राजनीतिक मजबूरी
कुलदीप बिश्नोई अपने पिता भजनलाल की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। राज्य में उनका करीब 6–7 प्रतिशत का स्थायी वोट बैंक माना जाता है, जो किसी भी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। ऐसे में भजनलाल के खिलाफ की गई टिप्पणी को नजरअंदाज करना उनके लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदेह हो सकता था।
खास बात यह भी है कि पिछले चार वर्षों में भाजपा में रहने के बावजूद उनके समर्थकों को अपेक्षित राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं मिल पाई, जिससे असंतोष पहले से ही पनप रहा था। यह विवाद उस असंतोष को और खुलकर सामने ले आया है।
पार्टी नेतृत्व की डैमेज कंट्रोल कोशिश
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय मंत्री Manohar Lal Khattar और मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini सक्रिय हो गए हैं। वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बडौली ने भी अपने तेवर नरम करते हुए कहा है कि बिश्नोई के विदेश से लौटने पर बातचीत कर समाधान निकाला जाएगा।
भाजपा के भीतर भी असहमति
इस पूरे मामले में दिलचस्प मोड़ तब आया जब केंद्रीय राज्य मंत्री Krishan Pal Gurjar ने अपनी ही पार्टी की नेता को नसीहत देते हुए कहा कि भजनलाल जैसे वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने राज्य के अन्य पूर्व मुख्यमंत्रियों के योगदान का भी उल्लेख किया, जिससे बिश्नोई को नैतिक समर्थन मिला।
विवाद की जड़
24 अप्रैल को पंचकूला में एक जनसभा के दौरान रेखा शर्मा ने चुनावी भाषण में भजनलाल और उनके बेटे चंद्रमोहन को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। इस बयान के बाद बिश्नोई परिवार ने कड़ा रुख अपनाया और मामला कानूनी दायरे तक पहुंच गया।
आगे क्या?
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि भाजपा नेतृत्व इस विवाद को कैसे सुलझाता है। यदि माफी नहीं होती, तो हरियाणा की राजनीति में एक बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।
कुलदीप बिश्नोई का अगला कदम न केवल उनकी राजनीतिक दिशा तय करेगा, बल्कि राज्य की सत्ता समीकरणों पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है।



